मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द...मंत्री कृष्णा गौर बोलीं- कांग्रेस ने ही रची अंदरूनी साजिश

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा दफ्तर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन को विपक्ष या किसी अन्य दल से नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के नेताओं से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। कृष्णा गौर ने दावा किया कि कांग्रेस के भीतर ही उनके खिलाफ माहौल बनाया गया और अंदरूनी स्तर पर ऐसी परिस्थितियां पैदा की गईं, जिनका असर उनके नामांकन पर पड़ा।
कांग्रेस के भीतर ही गुटबाजी
मंत्री कृष्णा गौर ने कांग्रेस द्वारा भाजपा पर लगाए जा रहे महिला विरोधी होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह मुद्दा महिला सम्मान का नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और आंतरिक राजनीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन आवश्यक जानकारी पूरी तरह दर्ज न होने के कारण रद्द हुआ। ऐसे में भाजपा पर आरोप लगाना तथ्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं को उचित सम्मान और न्याय देने का नहीं रहा है।
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तेलंगाना मामले का किया जिक्र
कृष्णा गौर ने अपने आरोपों को मजबूत करते हुए तेलंगाना के एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की एक महिला कार्यकर्ता ने पार्टी के एक वरिष्ठ नेता पर अन्याय का आरोप लगाया था। उस महिला ने कई नेताओं से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। मंत्री के अनुसार, इस पूरे मामले ने कांग्रेस के भीतर महिलाओं के प्रति पार्टी के रवैये पर सवाल खड़े किए थे।
कोर्ट के नोटिस का भी उठाया मुद्दा
मंत्री ने कहा कि संबंधित महिला ने बाद में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कृष्णा गौर का आरोप है कि इसके बावजूद इस मामले का उल्लेख नामांकन पत्र में नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी घोषित होने के बाद से ही कांग्रेस के कुछ नेता उनके खिलाफ सक्रिय हो गए थे और यही कारण रहा कि उन्हें कानूनी स्तर पर भी राहत नहीं मिल सकी।
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गुटबाजी और मतभेदों पर उठे सवाल
कृष्णा गौर ने कहा कि पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर मौजूद गुटबाजी, आपसी मतभेद और महिला नेताओं के प्रति पार्टी के व्यवहार को उजागर कर दिया है। उनके अनुसार, यह मामला केवल एक नामांकन रद्द होने का नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की आंतरिक स्थिति को सामने लाने वाला उदाहरण है। हालांकि, इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।












