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IPAC के ठिकानों पर ED की रेड :कोयला घोटाले से जुड़े तार, जांच में सामने आया मास्टरमाइंड

पश्चिम बंगाल के कोयला तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने IPAC के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में चल रही इस कार्रवाई में हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की भी जांच की जा रही है।
कोयला घोटाले से जुड़े तार, जांच में सामने आया मास्टरमाइंड
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म IPAC (Indian Political Action Committee) के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला तस्करी मामले से जुड़ी जांच के तहत की जा रही है। ED की यह रेड हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में की जा रही है। बेंगलुरु में कंपनी के को-फाउंडर ऋषिराज सिंह के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई है।

    पहले भी हो चुकी है छापेमारी

    इससे पहले भी इसी साल जनवरी में ED ने कोलकाता में IPAC के दफ्तर और कंपनी के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर तलाशी ली थी। तब कंपनी ने बयान जारी कर कहा था कि यह उनके लिए एक मुश्किल और दुर्भाग्यपूर्ण दिन था। हालांकि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग देने की बात भी कही थी।

    क्या है पश्चिम बंगाल का कोयला घोटाला

    यह मामला अवैध कोयला खनन और तस्करी से जुड़ा है। वर्ष 2020 में दर्ज एक FIR के आधार पर ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से अवैध तरीके से कोयले की खुदाई और चोरी की जा रही थी। इसमें कुछ आपराधिक तत्वों के साथ ECL, CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की बात भी सामने आई।

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    अनुप माजी को बताया गया मास्टरमाइंड

    ED की जांच में अनुप माजी को इस पूरे कोयला तस्करी सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बताया गया है। आरोप है कि वह ECL क्षेत्र से अवैध कोयला खनन करवाता था और चोरी किए गए कोयले का परिवहन कराता था। बताया गया कि वर्ष 2000 से 2015 के बीच अनुप माजी के खिलाफ अवैध खनन और कोयला चोरी से जुड़े 16 मामले दर्ज हुए थे, लेकिन प्रभाव और संरक्षण के चलते उस पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

    हजारों करोड़ रुपये की हेराफेरी

    जांच में यह भी सामने आया कि ECL क्षेत्र से अवैध खनन और चोरी के जरिए करीब ₹2,742 करोड़ से ज्यादा के कोयले की हेराफेरी की गई। ED ने 2021 में इस मामले में 46 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें कई अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड मिले थे।

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    हवाला नेटवर्क के भी मिले सुराग

    ED की जांच में यह भी सामने आया कि कोयला तस्करी से कमाए गए काले धन को सफेद करने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। जांच में यह भी आरोप लगा कि लगभग 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए IPAC तक पहुंचाए गए। इसी कड़ी में एजेंसी अब IPAC से जुड़े मामलों की जांच कर रही है।

    कंपनी का क्या कहना है

    IPAC ने पहले जारी बयान में कहा था कि वह कानून का सम्मान करती है और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेगी। कंपनी का कहना है कि वह एक पेशेवर संस्था है और किसी भी जांच में पारदर्शिता के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है।

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    कई राजनीतिक दलों के साथ काम कर चुकी है IPAC

    IPAC देश की एक प्रमुख पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जिसने कई बड़ी राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति और सलाहकार के तौर पर काम किया है। इनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC), DMK, YSR कांग्रेस, BRS, जेडीयू और शिवसेना जैसी पार्टियां शामिल हैं।

    रेड के दौरान सियासी विवाद भी हुआ था

    जनवरी में हुई छापेमारी के दौरान ED ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तलाशी में दखल दिया और पुलिस की मदद से कुछ डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज हटवा दिए। एजेंसी का दावा था कि इसके कारण अधिकारियों को बिना कुछ जब्त किए ही तलाशी रोकनी पड़ी।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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