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अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ का दायरा घटा, 17.59 मिलियन वर्ग किमी के साथ तीसरा सबसे कम स्तर रिकॉर्ड

Antarctic Sea Ice Record Low: औसत से 1 मिलियन वर्ग किमी कम, पिछले 4 साल में 4 सबसे कम अधिकतम स्तर, ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ी चिंता। वैज्ञानिकों के अनुसार यह औसत से एक मिलियन वर्ग किलोमीटर या लगभग 400,000 वर्ग मील कम है।  
अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ का दायरा घटा, 17.59 मिलियन वर्ग किमी के साथ तीसरा सबसे कम स्तर रिकॉर्ड
अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ का दायरा घटा

डेनवर (Denver), अमेरिका। NASA और नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर (NSIDC) के अनुसार अंटार्कटिक समुद्री बर्फ साल के सबसे ज़्यादा स्तर पर पहुंचने की आशंका 14 सितंबर को थी। तब बर्फ ने अनुमानित 17.59 मिलियन वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र कवर किया। यह रिकॉर्ड पर तीसरा सबसे कम स्तर है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह औसत से एक मिलियन वर्ग किलोमीटर या लगभग 400,000 वर्ग मील कम है।

समुद्री जीवों के लिए जरूरी

इस अधिकतम स्तर की पुष्टि का मतलब था कि महाद्वीप की समुद्री बर्फ पिछले चार सालों में सबसे कम हुई है। यह बर्फ ग्रह की जलवायु का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और समुद्री जीवन के लिए जरूरी है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो में नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. वॉल्ट मीयर ने कहा कि स्नो साइकल के इस चरण में बहुत ज्यादा बदलाव संभावित थे इसलिए सेंटर ने अधिकतम बर्फ घोषित करने में देरी की। अंटार्कटिक बर्फ आमतौर पर सितंबर में ( दक्षिणी गोलार्ध में सर्दियों के अंत के आसपास)  अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचती है और फरवरी में न्यूनतम स्तर तक कम हो जाती है। आर्कटिक के विपरीत (जो जमीन से घिरा एक महासागरीय बेसिन है)  अंटार्कटिक एक बड़ा महाद्वीप है जो महासागर से घिरा हुआ है। यह सर्दियों के दौरान समुद्री बर्फ को फैलने के लिए ज्यादा जगह देता है। लेकिन इससे बर्फ गर्म अक्षांशों तक भी फैल जाती है, जिससे गर्मियों में ज्यादा पिघलाव होता है। लेकिन हाल के वर्षों में सर्दियों और गर्मियों दोनों में कम समुद्री बर्फ के रिकॉर्ड टूटे हैं। इससे चिंताएँ बढ़ गई हैं कि ग्लोबल हीटिंग इस नुकसान का कारण हो सकती है।

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चार साल से कम हो रहा है फैलाव

मेलबर्न में मोनाश यूनिवर्सिटी में दक्षिणी महासागर की विशेषज्ञ डॉ. एरियान पुरिच ने कहा, पिछले चार सर्दियों में समुद्री बर्फ का अधिकतम स्तर रिकॉर्ड पर सबसे कम रहा है।यह एक ऐसे सिस्टम का बहुत स्पष्ट संकेत है जो बदल गया है। उन्होंने कहा कि यह अब कोई एक बार होने वाली घटना नहीं है। समुद्री बर्फ अब समुद्र के उतने बड़े हिस्से को नहीं ढंकती जितना पहले ढंकती थी। हम लगातार कई सर्दियों में बर्फ का स्तर कम देख रहे हैं। इससे पता चलता है कि समुद्री बर्फ का व्यवहार बदल रहा है क्योंकि हमारी जलवायु गर्म हो गई है। यह भविष्य की समस्या नहीं है। यह अभी की समस्या है।

 कुछ साल लगातार बढ़ी बर्फ

1979 से 2014 के बीच, अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ की कुल मात्रा हर दशक में लगभग 1 प्रतिशत बढ़ी। 2012 से 2014 तक लगातार तीन वर्षों में, सैटेलाइट ने सर्दियों में समुद्री बर्फ के फैलाव का नया रिकॉर्ड स्तर दर्ज किया। हालांकि 2015 में यह बढ़ोतरी रुक गई और 2016 से अंटार्कटिका के आसपास समुद्री बर्फ़ में काफी कमी आने लगी। इसके बाद कुछ वर्षों में बर्फ में थोड़ी बढ़ोतरी भी हुई। लेकिन, अंटार्कटिक में समुद्री बर्फ का दायरा सामान्य से कम ही रहा है। 2023 में बर्फ का न्यूनतम और अधिकतम स्तर, दोनों ही रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गए। वैज्ञानिक हर साल इस इलाके पर नजर रखेंगे ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कमी लंबे समय से चल रहे बदलाव का हिस्सा है या सिर्फ़ आंकड़ों में होने वाला उतार-चढ़ाव।

माइक्रोवेव देती हैं संकेत

समुद्री बर्फ के फैलाव का पता लगाने के लिए, वैज्ञानिक ऐसे सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करते हैं जिनमें पैसिव माइक्रोवेव सेंसर लगे होते हैं। ये सेंसर पृथ्वी से निकलने वाली माइक्रोवेव एनर्जी को मापते हैं। खुली पानी की सतह की तुलना में समुद्री बर्फ से ज़्यादा एनर्जी निकलती है, इसलिए माइक्रोवेव इमेज में यह साफ दिखाई देती है। क्योंकि माइक्रोवेव बादलों के आर-पार जा सकती हैं, इसलिए सैटेलाइट मौसम की परवाह किए बिना नियमित रूप से समुद्री बर्फ पर नज़र रख सकते हैं।

48 साल पहले हुई थी शुरुआत

इस रिकॉर्ड की शुरुआत 1978 के आखिर में NASA के निंबस-7 (Nimbus-7) सैटेलाइट से मिले डेटा के साथ हुई थी। इसके बाद 1987 में डिफेंस मेटियोरोलॉजिकल सैटेलाइट प्रोग्राम (DMSP) के सैटेलाइट्स और 2002 से 2011 के बीच NASA के एक्वा (Aqua) सैटेलाइट का इस्तेमाल किया गया। 2025 में, वैज्ञानिकों ने जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के GCOM-W सैटेलाइट से मिली जानकारी का इस्तेमाल करना शुरू किया।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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