सिद्धार्थ तिवारी, जबलपुर। इंस्टाग्राम खुद को शोकेस करने के साथ-साथ अब रिश्तों में भी मिठास ला रहा है। इसका असर सास, बहू के रिश्ते पर भी पड़ा है। शहर में सास-बहुएं भी मिलकर रील्स बना कर अपलोड कर रही हैं। इस 'कोलेबोरेशन' से खराब रिश्ते अब सहेली की तरह हो रहे हैं। हालांकि इसका नुकसान घर में रहने वाले पिता और बेटे झेल रहे हैं। अब घर में सिर्फ बहू की चल रही है। ऐसे 40 प्रतिशत मामले हैं, जिसमें सास, बहू के विवाद में गिरावट देखी जा रही है।
पहले बहू रील्स देखती थी तो विवाद होता था, लेकिन अब बहू सास को रील्स दिखाते हुए ऐसे ही रील्स बनाने को कहती है, इसमें दोनों की सहमति होती है। इसके बाद रील बनाते हुए दोनों सहेलियों जैसी बन जाती हैं। इंस्टाग्राम में रील्स बनाने का चलन बहुत तेजी से चल रहा है, कोई कहीं भी जाए उस स्थान की रील्स बनाकर अपलोड करता है। वहीं इसका चलन सास, बहू के रिश्ते में भी पड़ रहा है।
परामर्शदाता अंशुमान शुक्ला के पास सास, बहू के मामले लगभग रोज ही 35 से 40 आते हैं। लेकिन अब इन मामलों में समझौते के लिए उन्हें आपसी सहमति और एक होकर रहने का सुझाव दिया जा रहा है। वहीं ज्यादातर मामलों में सास की शिकायत होती है कि उनकी बहू दिन भर मोबाइल चलाती रहती है। लेकिन अब इसी मोबाइल को जरिया बनाकर बहू ने सास के दिल में जगह हासिल कर ली है। इसमें लगभग 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है।
विजय नगर क्षेत्र में एक महिला और उसकी बहू में विवाद होता था। अंशुमान शुक्ला के पास मामला पहुंचा तो उन्होंने साथ रहने की सलाह देकर रील्स दिखार्इं। पहले तो दोनों में संकोच था, लेकिन अब सास बहू की बुराई नहीं सुन सकती। दोनों रील्स बनाकर अपना टाइमपास करती हैं और उसे सोशल मीडिया में अपलोड करती हैं।
अधारताल क्षेत्र में रहने वाली एक बहू सास से अलग रहने के लिए कहती थी। इसकी शिकायत सास ने परामर्शदाता से की, जिसके बाद बहू और सास को बुलाकर काउंसलिंग की गई और फिर अब दोनों मिलकर रील्स बनाती हैं।
आज घरेलू हिंसा बहुत अधिक हो गई है। इसमें सास, बहू के विवाद सामने आते हैं, जिसमें बहू आज के युग की होने के कारण मोबाइल का प्रयोग ज्यादा करती हैं, जबकि सास का मन घरेलू काम में लगता है। लेकिन अब सोशल मीडिया के माध्यम से दोनों ने रील्स बनाकर उसे अपलोड करना शुरू कर दिया है, जिससे विवाद नहीं होते।
अंशुमान शुक्ला, प्रधान परामर्शदाता, कुटुम्ब न्यायालय