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महंगाई से बचने का देसी जुगाड़ :न पेट्रोल, न पार्किंग, न चालान की चिंता, रॉयल फीलिंग के साथ ‘रानी’ पर निकलते है राजाराम

राजाराम बाबू का यह भी कहना है कि जहां एक बाइक करीब एक लाख रुपये और उससे अधिक की आती है, वहीं उतनी ही कीमत में एक घोड़ी भी खरीदी जा सकती है। घोड़ी की सवारी से शरीर को एक्सरसाइज मिलती है, खर्च भी कम होता है
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न पेट्रोल, न पार्किंग, न चालान की चिंता, रॉयल फीलिंग के साथ ‘रानी’ पर निकलते है राजाराम
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अम्बरीश आनंद, ग्वालियर। ग्वालियर की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसे देखकर लोग अपनी रफ्तार खुद ही धीमी कर लेते हैं। हॉर्न बजाती गाड़ियों और धुएं से भरी ट्रैफिक के बीच अचानक एक घोड़ी शान से चलती नजर आती है और उसकी पीठ पर सवार होते हैं राजाराम बाबू। जी हां, जहां दुनिया पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान है, वहीं ग्वालियर के हजीरा इलाके के राजाराम बाबू ने इसका ऐसा देशी और दमदार जवाब दिया है, जो अब शहर की चर्चा बन चुका है। वे अपनी 6 साल की घोड़ी रानी के साथ शहर की सड़कों पर नजर आते हैं। जहां लोग बाइक और कार से सफर करते हैं, वहीं राजाराम बाबू शान से घोड़ी पर सवार होकर अपने काम पर निकलते हैं।राजाराम बाबू का मानना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में उन्होंने पहले ही पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प चुन लिया है।

    वे बताते हैं कि आज एक बाइक खरीदने में करीब एक लाख रुपये खर्च हो जाते हैं, जबकि उतनी ही कीमत में एक अच्छी घोड़ी भी खरीदी जा सकती है। इतना ही नहीं, घुड़सवारी से शरीर को बेहतर एक्सरसाइज मिलती है और एक अलग तरह की ‘रॉयल फीलिंग’ भी आती है। जब भी वे घोड़ी पर सवार होकर सड़कों से गुजरते हैं, लोग उन्हें देखकर रुक जाते हैं कोई वीडियो बनाता है तो कोई उनके इस अनोखे फैसले की तारीफ करता है। जहां एक तरफ दुनिया हाईटेक हो रही है, वहीं राजाराम बाबू का ये कदम एक अलग ही संदेश देता है कभी-कभी भविष्य का रास्ता, अतीत से होकर ही गुजरता है। बढ़ती महंगाई, प्रदूषण और भाग दौड़ भरी जिंदगी के बीच यह घोड़ी वाला सफर सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक सोच है, सस्टेनेबल और सादगी भरी जिंदगी की।

    ‘रानी’ की लाइफ भी किसी महारानी से कम नहीं

    राजाराम बाबू अपनी घोड़ी रानी का खास ख्याल रखते हैं। उसके खाने में चना, ड्राई फ्रूट्स और दूध शामिल है। साफ-सफाई और देखभाल भी पूरी शिद्दत से की जाती है। इसे वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करते है। इसके साथ ही वे चौराहों पर रुककर लोगों को घुड़सवारी के फायदे भी बताते हैं। वे कहते है कि उन्हें घुड़सवारी का शौक पहले से था, तो उन्होंने सोचा की क्यों न गाड़ी की जगह घोड़ी से शहर का भ्रमण किया जाए। वे अपनी घोड़ी रानी पर पूरे शहर का भ्रमण करते है और कहीं भी जाना हो इसी का इस्तेमाल करते है।

    यह भी पढ़ें: ग्वालियर RTO पर अवैध वसूली का आरोप: हाइवे पर प्राइवेट लोग वसूल रहे पैसा, विरोध पर ड्राइवरों को धमकी

    गाड़ी से खर्चा कम

    राजाराम बाबू का यह भी कहना है कि जहां एक बाइक करीब एक लाख रुपये और उससे अधिक की आती है, वहीं उतनी ही कीमत में एक घोड़ी भी खरीदी जा सकती है। घोड़ी की सवारी से शरीर को एक्सरसाइज मिलती है, खर्च भी कम होता है और साथ ही एक अलग तरह की रॉयल फीलिंग भी आती है। इसके साथ ही चालान और मेंटेनेंस और सर्विस का भी कोई झंझट नहीं है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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