Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

MP News :सोशल मीडिया पर भोपाल की मेट्रो ट्रेन और शिकारा की सैर देख, घर से निकले चार बच्चे

भोपाल की खूबसूरती को स्क्रीन पर देखकर कई बच्चे यहां पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस साल (2026) में ऐसा तीसरा मामला सामने आया है। वहीं, बीते तीन सालों में 138 बच्चे भोपाल पहुंचे हैं।
सोशल मीडिया पर भोपाल की मेट्रो ट्रेन और शिकारा की सैर देख, घर से निकले चार बच्चे
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पल्लवी वाघेला, भोपाल। 'अंकल रील्स में देखा था, कश्मीर की तरह भोपाल में शिकारा चलता है। मेट्रो ट्रेन की रील भी देखी थी। हम लोगों का बहुत मन कर रहा था इसमें घूमने का। घर में भी एक-दो बार कहा था, लेकिन सबने टाल दिया तो हम लोगों ने गुल्लक का पैसा जोड़कर घूमने का प्लान कर दिया और घर से निकल आए।' भोपाल में शिकारे और मेट्रो की सैर से प्रभावित होकर जबलपुर क्षेत्र के चार बच्चे अपने घर से निकलकर यहां पहुंचे बच्चों ने यह बात बताई। हालांकि, एक बच्चे ने अपने घर बात करने का प्रयास किया और कॉल कट कर दी, लेकिन इसी साइलेंट कॉल ने परिजन को उनके ठिकाने की जानकारी दे दी।

    10 से 14 साल के बच्चे

    शिकारे में सैर करने निकले इन बच्चों की उम्र 10 से लेकर 14 वर्ष है। मध्यमवर्गीय परिवार के इन बच्चों में 10 और 13 साल के दो भाई हैं, जबकि बाकी दो मोहल्ले के उनके दोस्त। सभी ने अपनी गुल्लक तोड़कर उसमें से निकले 519 रुपए जमा किए और चुपचाप जबलपुर से भोपाल की ट्रेन में सवार हो गए। बच्चों ने बताया कि यहां घूमने के बाद पैसे बचते तो ट्रेन से ही उज्जैन जाने और वहां से वापस घर जाने की प्लानिंग थी। बच्चों ने बताया कि वापसी में सोचते कि घर जाकर क्या बहाना बनाना है।

    साइलेंट कॉल ने दिया क्लू

    जानकारी के मुताबिक चारों बच्चे घर से निकले और भोपाल पहुंचे। यहां आने के बाद भूख लगी तो एक होटल पर नाश्ता करने रुके। वहीं, एक नागरिक ने छोटे बच्चे से बातचीत शुरू की। बच्चे ने उनसे कहा कि वो मां को बताना भूल गया है कि वह नाश्ता करने आया है। उसे मोबाइल चाहिए। बच्चे को मां का नंबर याद था। बच्चे ने कॉल किया और मां के फोन उठाने पर डरकर कटकर दिया। इसी साइलेंट कॉल से बच्चों का पता मिला।

    ये भी पढ़ें: Vastu Tips : घर में बरकत नहीं टिकती? वास्तु के ये छोटे बदलाव बदल देंगे आपकी किस्मत

    रेस्क्यू कर परिवार को सौंपा 

    बता दें, यह पहली बार नहीं है। साल 2026 में यह तीसरी घटना है जब भोपाल घूमने की चाह में बच्चों ने घर छोड़ा। वहीं, साल 2023-25, तीन साल के आंकड़ो पर गौर करें तो 138 बच्चे बड़े पर्दे, टीवी सीरियल या वेब सीरीज या फिर सोशल मीडिया रील्स में भोपाल की सुंदरता और खान-पान का स्वाद चखने, भोपाल पहुंचे और इन्हें रेस्क्यू कर परिवार को सौंपा गया।

    साल       भोपाल आए बच्चे

    2023         44

    2024         59

    2025         35

    (आंकड़े हेल्पलाइन और रेलवे पुलिस से प्राप्त)

    बच्चों को वाजिब कारण देकर समझाएं

    अब बच्चे बहुत स्मार्ट हैं। काउंसलिंग में पता चलता है कि किसी शहर को देखने की जब बच्चों ने इच्छा जताई तो अभिभावकों ने हां करके उन्हें बहला दिया, लेकिन कभी लेकर नहीं गए। बच्चों की कोई विश यदि आप पूरी नहीं कर सकते तो उन्हें वाजिब कारण देकर समझाएं। साथ ही यह भी जरूरी है कि उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखें।

    दिव्या दुबे मिश्रा, मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर

    ये भी पढ़ें: कम कीमत, जबरदस्त सेफ्टी : 1 करोड़ से ज्यादा लोगो की पहली पंसद बना ये स्टाइलिश हेलमेट, दे रहा महंगे मॉडल्स को टक्कर

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

    Latest Posts