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Innovation in Education :कटनी 'डाइट' का नवाचार, अब QR कोड से पढ़ाई करेंगे बच्चे

कटनी के सरकारी स्कूल में छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग का मॉडल तैयार किया गया है। 'डाइट' ने कक्षा 6वीं से 8वीं तक के लिए यूट्यूब लिंक से क्यूआर कोड बनाकर पढ़ाई कराना शुरू किया गया है। तकनीक के इस नवाचार को खासी सराहना मिल रही है।
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कटनी 'डाइट' का नवाचार, अब QR कोड से पढ़ाई करेंगे बच्चे
कटनी में इस तरह क्यूआर कोड बनाकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

अजय शर्मा, कटनी। शिक्षा के क्षेत्र में कटनी जिले ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो प्रदेश के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल सकती है। डाइट   (डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग) कटनी ने कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल लर्निंग का एक सुलभ मॉडल तैयार किया है। अब छात्रों को कठिन पाठ समझने के लिए केवल एक क्यूआर कोड स्कैन करना होगा।

जहां शिक्षकों की कमी, वहां ज्यादा लाभ

डाइट द्वारा हिंदी, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान के प्रत्येक अध्याय के लिए विशेष यूट्यूब लिंक एकत्रित कर उनके क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं। डाइट के व्याख्याता राजेन्द्र असाटी के अनुसार, इस पहल का सबसे बड़ा लाभ उन स्कूलों को मिलेगा जहां शिक्षकों की कमी है। वहां स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से इन कोड्स को स्कैन कर विशेषज्ञ शिक्षकों के वीडियो लेक्चर से पढ़ाई कराई जा सकेगी।

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ऐसे काम करता है क्यूआर कोड

व्याख्याता राजेन्द्र असाटी ने बताया कि इस पहल के तहत हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों के प्रत्येक चैप्टर के लिए यूट्यूब लिंक एकत्रित कर उनके क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं। इन क्यूआर कोड को स्कैन करते ही छात्र और शिक्षक संबंधित पाठ को आसानी से देख, समझ और पढ़ा सकते हैं।

इनका रहा विशेष सहयोग

यह नवाचार न केवल स्कूलों बल्कि घरों के लिए भी क्रांतिकारी है। यदि अभिभावक इन कोड्स का उपयोग सीख लें, तो बच्चे घर पर मोबाइल का उपयोग गेम खेलने के बजाय पढ़ाई के लिए करेंगे। इस परियोजना में राज्य शिक्षा केंद्र के ओआईसी विनोद द्विवेदी, डीईओ राजेश अग्रहरी और डीपीसी पीएन तिवारी का विशेष सहयोग रहा। जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से शिक्षा को अंतिम छोर के बच्चे तक पहुंचाना है, ताकि 'डिजिटल इंडिया' का सपना ग्रामीण कक्षाओं में भी साकार हो सके।

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घर पर पैरेंट्स भी क्यूआर से पढ़ा सकते हैं

जहां स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां स्मार्ट बोर्ड से कक्षाएं चल सकेंगी। यदि पैरेंट्स को भी उपयोग सिखाया जाए तो बच्चे घर पर मोबाइल का सकारात्मक उपयोग कर सकेंगे।   

राजेश अग्रहरि, जिला शिक्षा अधिकारी, कटनी

यह मॉडल पूरे जिले में लागू किया जाएगा

यह क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी जहां शिक्षकों की कमी है। हम इस मॉडल को पूरे जिले में व्यापक स्तर पर लागू कर रहे हैं।

आशीष तिवारी, कलेक्टर, कटनी

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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