पीएम मोदी ने मशहूर डच डैम का दौरा किया,बोले- पानी बचाने और बाढ़ रोकने में नीदरलैंड से सीखने की जरूरत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे का एक अहम पड़ाव उस समय देखने को मिला, जब उन्होंने डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ दुनिया के सबसे चर्चित और तकनीकी रूप से उन्नत बांधों में शामिल अफ्सलाउटडाइक डैम का दौरा किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, क्लाइमेट चेंज और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। पीएम मोदी ने इस दौरे को सिर्फ एक औपचारिक विजिट नहीं बताया, बल्कि इसे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी सीख कहा। उन्होंने कहा कि वाटर मैनेजमेंट के मामले में नीदरलैंड ने पूरी दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया है और भारत भी इस दिशा में आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए तेजी से काम कर रहा है।
अफ्सलाउटडाइक डैम क्यों है दुनिया में खास?
नीदरलैंड का अफ्सलाउटडाइक डैम दुनिया के सबसे बड़े और चर्चित जल प्रबंधन प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। यह डैम समुद्री पानी को नियंत्रित करने, बाढ़ से सुरक्षा देने और मीठे पानी को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। यह बांध सिर्फ इंजीनियरिंग का नमूना नहीं बल्कि नीदरलैंड की उस सोच का हिस्सा है, जिसने समुद्र से लड़कर अपने देश को सुरक्षित बनाया। समुद्र तल से नीचे बसे कई इलाकों को बचाने में इस डैम की बड़ी भूमिका रही है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस प्रोजेक्ट की तारीफ करते हुए कहा कि अफ्सलाउटडाइक सिर्फ एक डैम नहीं, बल्कि इनोवेशन, विजन और आधुनिक तकनीक का प्रतीक है।
पीएम मोदी बोले- दुनिया को नीदरलैंड से सीखना चाहिए
डैम का दौरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में नीदरलैंड ने बेहतरीन काम किया है और दुनिया को उनके अनुभवों से सीखने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी, बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी और इनलैंड वाटर नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी।
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भारत और नीदरलैंड के बीच बढ़ेगा सहयोग
इस दौरे के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन और समुद्री तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। अधिकारियों के मुताबिक दोनों देश भविष्य में कई संयुक्त परियोजनाओं पर काम कर सकते हैं। खासतौर पर क्लाइमेट चेंज के कारण बढ़ती बाढ़, समुद्री खतरे और पानी की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। नीदरलैंड लंबे समय से वाटर टेक्नोलॉजी और फ्लड कंट्रोल के क्षेत्र में दुनिया के सबसे आगे रहने वाले देशों में शामिल है। वहीं भारत भी लगातार अपने जल संसाधनों को बेहतर तरीके से उपयोग करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी भविष्य में बड़े प्रोजेक्ट्स का रास्ता खोल सकती है।
गुजरात के कल्पसर प्रोजेक्ट पर भी हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय के मुताबिक पीएम मोदी और डच अधिकारियों के बीच गुजरात के महत्वाकांक्षी 'कल्पसर प्रोजेक्ट' पर भी चर्चा हुई। यह परियोजना खंभात की खाड़ी के पास एक बड़े जलाशय और बांध के निर्माण से जुड़ी है। इस प्रोजेक्ट का मकसद मीठे पानी का भंडारण बढ़ाना, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और पेयजल की जरूरतों को पूरा करना है। साथ ही इससे ऊर्जा उत्पादन और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्लाइमेट चेंज से निपटने पर भी फोकस
प्रधानमंत्री मोदी और रॉब जेटेन की बातचीत में क्लाइमेट चेंज का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दोनों नेताओं ने माना कि बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट बेहद जरूरी है। नीदरलैंड पहले से ही समुद्र के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। भारत भी अब इसी दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े और विविध जलवायु वाले देश के लिए डच मॉडल कई मामलों में उपयोगी साबित हो सकता है।
यूरोप दौरे का अहम हिस्सा है यह यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा उनके चार देशों के यूरोप दौरे का हिस्सा है। इस दौरे में वह स्वीडन, नॉर्वे, इटली और नीदरलैंड्स जा रहे हैं। नीदरलैंड यात्रा के दौरान व्यापार, तकनीक, रक्षा और जल प्रबंधन जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है। इससे पहले भी भारत और नीदरलैंड्स के बीच कई समझौते हो चुके हैं, लेकिन इस बार वाटर मैनेजमेंट और क्लाइमेट रेजिलिएंस पर खास जोर देखने को मिला। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि पीएम मोदी का यह दौरा भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












