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इंदौर में भीषण गर्मी से सूखे 3538 बोरिंग:650 निगम टैंकर सड़कों पर, फिर भी संकट बरकरार

शहर में बढ़ते जल संकट और हजारों बोर सूखने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने SCADA सेंटर में हाईलेवल बैठक की। वाल्व से छेड़छाड़, सीपेज और टैंकर प्रबंधन को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए गए।
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650 निगम टैंकर सड़कों पर, फिर भी संकट बरकरार

इंदौर में भीषण गर्मी के बीच गहराते जल संकट ने नगर निगम की चिंता बढ़ा दी है। शहर के कई इलाकों से लगातार मिल रही पानी की शिकायतों और टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता के बीच सोमवार को मुसाखेड़ी स्थित SCADA सेंटर में महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में हाईलेवल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, अपर आयुक्त आशीष पाठक, जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा, एमआईसी सदस्य राजेश उदावत, जल विभाग के अधिकारी और L&T कंपनी के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में सामने आया कि इस बार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने शहर की जल व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में संचालित 6,500 सरकारी बोरिंग में से 3,538 बोर पूरी तरह सूख चुके हैं। भूजल स्तर में आई भारी गिरावट के कारण कई इलाकों में पाइपलाइन से पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके चलते टैंकरों के भरोसे व्यवस्था संभाली जा रही है।

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सात नई टंकियों से मिली राहत, 95 फीसदी सप्लाई सामान्य होने का दावा

अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि पिछले वर्ष से अब तक शहर में सात नई पानी की टंकियां शुरू की गई हैं, जिससे करीब 18 से 20 प्रतिशत आबादी को फायदा मिल रहा है। इसके अलावा लगभग 20 एमएलडी अतिरिक्त पानी टंकियों और टैंकरों के जरिए सप्लाई किया जा रहा है। निगम प्रशासन ने दावा किया कि अगले एक-दो दिनों में शहर के लगभग 95 प्रतिशत क्षेत्रों में जलापूर्ति सामान्य हो जाएगी।

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650 निगम टैंकर सड़कों पर, फिर भी संकट बरकरार

जल संकट से निपटने के लिए नगर निगम के 650 टैंकर लगातार शहर में दौड़ रहे हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा अतिरिक्त टैंकर भी लगाए गए हैं। बावजूद इसके कई इलाकों में समय पर पानी नहीं पहुंचने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने माना कि टैंकर प्रबंधन फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने बताया कि टैंकर संचालकों को तीन दिन पहले ही करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, ताकि पानी सप्लाई बाधित न हो।

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वाल्व से छेड़छाड़ और सीपेज ने बिगाड़ी व्यवस्था

बैठक में तकनीकी रिपोर्ट ने जल विभाग की चिंता और बढ़ा दी। जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा ने बताया कि कई मुख्य पाइप लाइनों और जल टंकियों के वाल्व में सीपेज और छेड़छाड़ के मामले सामने आए हैं। बीएफ-2 लाइन से जुड़ी 18 टंकियां प्रभावित हुईं। लालबाग क्षेत्र में मास्टर वाल्व से लीकेज मिला, जबकि गंगवाल, शिवानी नगर और अन्य क्षेत्रों में वाल्व से छेड़छाड़ की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद निगम प्रशासन ने सभी वाल्वमैन की बैठक बुलाकर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

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L&T की कार्यप्रणाली पर महापौर नाराज

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बैठक में L&T कंपनी के अधिकारियों से O&M टीमों की संख्या और कार्यप्रणाली की जानकारी मांगी। पर्याप्त टीमें उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। निगम आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को मंगलवार को निगम मुख्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए।

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निर्माण कार्यों में ट्रीटेड वॉटर उपयोग करने के निर्देश

महापौर ने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा कि मकान निर्माण में पीने के पानी का उपयोग न किया जाए। निर्माण कार्यों में ट्रीटेड वॉटर इस्तेमाल किया जाए और पानी की बर्बादी रोकी जाए।

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जहां टैंकर नहीं पहुंचेंगे, वहां होंगे नए बोर और हाइड्रेंट

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन इलाकों में टैंकर पहुंचाने में परेशानी हो रही है, वहां नए बोरिंग कराए जाएंगे और हाइड्रेंट लगाए जाएंगे। वर्तमान में शहर में उपचारित पानी के उपयोग के लिए 42 हाइड्रेंट संचालित हैं।

SCADA सिस्टम से होगी लाइव मॉनिटरिंग

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि नर्मदा से मिलने वाले पानी का पूरी पारदर्शिता से वितरण किया जा रहा है। मुसाखेड़ी स्थित SCADA सिस्टम के जरिए हर टंकी और जलाशय की लाइव मॉनिटरिंग हो रही है। उन्होंने साफ कहा कि जल वितरण में भेदभाव के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जहां पाइपलाइन से पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां पार्षदों को टैंकर उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही 311 एप पर आने वाली शिकायतों पर भी त्वरित कार्रवाई की जा रही है।

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तीन साल से जल संरक्षण पर काम, फिर भी संकट गहराया

महापौर ने कहा कि नगर निगम पिछले तीन वर्षों से वर्षा जल संचयन, तालाबों की पुरानी चैनलों को पुनर्जीवित करने और जल स्रोतों के संरक्षण पर लगातार काम कर रहा है। लेकिन भीषण गर्मी और भूजल स्तर में लगातार गिरावट के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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