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‘विद्या’ स्कॉलरशिप कार्यक्रम के 10 साल:10,000 नोटबुक्स का किया वितरण, बेटियों की शिक्षा को मिला नया सहारा

इंदौर में ‘विद्या’ गर्ल्स स्कॉलरशिप प्रोग्राम ने अपने 10 साल पूरे कर लिए। 2016 में शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे जरूरतमंद छात्राओं और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा से जुड़ती गई। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में एक नई सामाजिक पहल की शुरुआत भी की गई और करीब 2500 छात्र-छात्राओं को 10,000 नोटबुक्स वितरित की गईं।
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10,000 नोटबुक्स का किया वितरण, बेटियों की शिक्षा को मिला नया सहारा

शिक्षा को आगे बढ़ाने और जरूरतमंद बच्चों की मदद करने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘विद्या’ गर्ल्स स्कॉलरशिप प्रोग्राम अब अपने 10 साल पूरे कर चुका है। यह पहल वर्ष 2016 में शुरू हुई थी और पिछले एक दशक में इसने कई छात्राओं और छात्रों की पढ़ाई में सहयोग दिया है। इस अवसर पर इंदौर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें न केवल इस यात्रा के 10 साल पूरे होने की खुशी मनाई गई, बल्कि एक नई सामाजिक पहल की शुरुआत भी की गई।

एक छोटी शुरुआत, आगे चलकर बड़ी बनी मदद

2016 में जब इस स्कॉलरशिप कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी, तब इसका उद्देश्य सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं की पढ़ाई में मदद करना था। समय के साथ यह प्रयास बढ़ता गया और इसमें कई नए सहयोग और गतिविधियां जुड़ती गईं। धीरे-धीरे यह योजना सिर्फ स्कॉलरशिप तक सीमित नहीं रही, बल्कि आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों की जरूरतों को भी इसमें शामिल किया गया।

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आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को मिली मदद

इस बार कार्यक्रम के दौरान एक बड़ा कदम उठाया गया। आदिवासी क्षेत्रों के हॉस्टल में रहने वाले करीब 2500 छात्र-छात्राओं को 10,000 नोटबुक्स वितरित की गईं। इन क्षेत्रों में कई बच्चों को पढ़ाई के लिए बुनियादी सामग्री भी आसानी से नहीं मिल पाती। ऐसे में नोटबुक्स का यह वितरण उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुआ।

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शिक्षा के साथ बदलती सोच

‘विद्या’ कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसे चलाने वाले लोग वरिष्ठ नागरिक हैं, जिन्होंने अपने जीवन में बच्चों की शिक्षा और परिवार की जिम्मेदारियों को करीब से देखा है। अब वही लोग उन बच्चों की मदद कर रहे हैं, जिनका उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है, लेकिन जिनके सपनों से वे जुड़ाव महसूस करते हैं।

ट्रस्ट का सहयोग

इस कार्यक्रम में मुंबई स्थित डिडवानिया (रतनलाल) चैरिटेबल ट्रस्ट ने भी सहयोग दिया। ट्रस्ट की ओर से 2 लाख रुपए से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई, जिससे 10,000 नोटबुक्स की व्यवस्था संभव हो सकी। इस सहयोग ने कार्यक्रम को और मजबूत बनाया और जरूरतमंद बच्चों तक मदद पहुंचाने में योगदान दिया।

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कार्यक्रम में क्या कहा गया

कार्यक्रम में शामिल वरिष्ठ सदस्यों ने इस पहल की यात्रा और उसके प्रभाव पर बात की। संस्था के अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 10 सालों में इस कार्यक्रम ने यह दिखाया है कि छोटी मदद भी किसी बच्चे के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। कई छात्राओं ने इस सहायता के कारण अपनी पढ़ाई जारी रखी और आगे बढ़ीं। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक शिक्षा की मदद पहुंच सके।

सचिव का विचार

संस्था के सचिव ने कहा कि यह सिर्फ एक स्कॉलरशिप नहीं है, बल्कि उन बेटियों और बच्चों के सपनों का सहारा है, जिनके पास संसाधन कम हैं लेकिन हौसला बड़ा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए छोटी-छोटी जरूरतें भी बहुत मायने रखती हैं और उन्हें पूरा करने की कोशिश ही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।

समाज में बदलता असर

इस पहल का असर सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। कई परिवारों को यह महसूस हुआ कि उनके बच्चों की पढ़ाई में समाज भी साथ खड़ा है। इससे शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है और कई बच्चों ने स्कूल जाना जारी रखा है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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