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Bhopal Metro:भोपाल मेट्रो को मिलेगी नई रफ्तार, दो दिन बंद रहेगा संचालन, सिग्नलिंग सिस्टम की होगी जांच

भोपाल मेट्रो के संचालन में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सिग्नलिंग सिस्टम के निरीक्षण के लिए कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम शहर पहुंच चुकी है। जांच पूरी होने के बाद मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलने की उम्मीद है।
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भोपाल मेट्रो को मिलेगी नई रफ्तार, दो दिन बंद रहेगा संचालन, सिग्नलिंग सिस्टम की होगी जांच
फाइल फोटो

भोपाल। शहर में मेट्रो सेवा को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में सुभाष नगर से एम्स स्टेशन के बीच बुधवार और गुरुवार को मेट्रो का संचालन आम यात्रियों के लिए बंद रखा गया है। इन दो दिनों के दौरान कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम सिग्नलिंग सिस्टम का निरीक्षण और परीक्षण करेगी। अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने और मंजूरी मिलने के बाद मेट्रो संचालन में बड़ा बदलाव दिखाई देगा। इससे ट्रेनों की आवाजाही बढ़ेगी, प्रतीक्षा समय कम होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

क्यों जरूरी है सिग्नलिंग सिस्टम?

किसी भी मेट्रो परियोजना में सिग्नलिंग सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी व्यवस्था मानी जाती है। यही सिस्टम ट्रेनों की गति नियंत्रित करता है और उनके बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने का काम करता है। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि एक ही रूट पर कई ट्रेनें सुरक्षित तरीके से संचालित हो सकें। बिना सिग्नलिंग सिस्टम के मेट्रो की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं किया जा सकता।

अभी क्यों धीमी है भोपाल मेट्रो?

भोपाल मेट्रो सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण ट्रेनों को केवल एक ट्रैक पर चलाया जा रहा है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबे अंतराल के बाद मेट्रो मिलती है। कई बार लोगों को 75 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इसी कारण मेट्रो की रफ्तार और संचालन व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

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एक ही ट्रैक से हो रहा है आना-जाना

अभी सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो एक ही ट्रैक का उपयोग कर रही है। जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। दूसरे ट्रैक का उपयोग नियमित संचालन में नहीं हो रहा है। इससे ट्रेनों की संख्या सीमित रहती है और समय अंतराल भी बढ़ जाता है। नया सिस्टम लागू होने के बाद दोनों ट्रैक पर संचालन शुरू किया जा सकेगा।

800 करोड़ रुपये की परियोजना का अहम चरण

भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं के लिए सिग्नलिंग सिस्टम विकसित करने का बड़ा काम किया जा रहा है। लगभग 30 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के लिए करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से यह व्यवस्था तैयार की जा रही है। सुभाष नगर से एम्स के बीच का हिस्सा इस परियोजना का पहला चरण माना जा रहा है, जहां तकनीकी काम लगभग पूरा हो चुका है।

दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक

भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जिसका उपयोग दिल्ली मेट्रो में किया जाता है। इस तकनीक की मदद से ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित और तेज होगा। ट्रेनों के बीच का अंतर कम किया जा सकेगा और जरूरत के अनुसार उनकी संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी। इससे यात्रियों को ज्यादा सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?

सिग्नलिंग सिस्टम शुरू होने के बाद भोपाल मेट्रो के संचालन में सबसे बड़ा बदलाव उसकी उपलब्धता में दिखाई देगा। ट्रेनों के बीच का लंबा अंतराल कम होगा और यात्रियों को कम समय में मेट्रो मिल सकेगी। दोनों दिशाओं में नियमित संचालन शुरू होने से यात्रा आसान बनेगी। साथ ही सुबह और शाम के व्यस्त समय में भी अधिक फेरे चलाए जा सकेंगे, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को राहत मिलेगी।

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जुलाई में आ सकता है नया शेड्यूल

मेट्रो प्रबंधन के अनुसार CMRS की जांच पूरी होने और मंजूरी मिलने के बाद सिग्नलिंग सिस्टम को नियमित रूप से चालू किया जाएगा। इसके बाद जुलाई में नया टाइम टेबल और संचालन शेड्यूल जारी होने की संभावना है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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