MP हाई कोर्ट को मिलेगा नया जज, अमित लाहोटी कल संभालेंगे जिम्मेदारी, केंद्र सरकार ने जारी की नियुक्ति अधिसूचना

केंद्र सरकार ने अधिवक्ता अमित लाहोटी को हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को लेकर केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने 7 अगस्त 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की। अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 224 की धारा (1) के तहत अमित लाहोटी को हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त करने की मंजूरी दी है। उनकी नियुक्ति दो वर्ष की अवधि के लिए की गई है। अमित लाहोटी का कार्यकाल उस दिन से शुरू होगा, जिस दिन वह हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में अपना पदभार संभालेंगे।
शपथ ग्रहण समारोह कल
नियुक्ति के बाद अमित लाहोटी के शपथ ग्रहण और स्वागत समारोह की तारीख व समय तय कर दिया गया है। हाई कोर्ट के आधिकारिक अपडेट के मुताबिक, 10 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे शपथ ग्रहण और स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही नियुक्ति के बाद उनके पदभार ग्रहण की प्रक्रिया की तारीख और समय भी औपचारिक रूप से तय हो गया है।
विधि मंत्रालय ने जारी किया नियुक्ति आदेश
अमित लाहोटी की नियुक्ति का आदेश केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के नियुक्ति प्रभाग की ओर से जारी किया गया है। मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 224 के तहत यह नियुक्ति की है। नियुक्ति संबंधी आदेश को भारत सरकार के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित करने के लिए भी भेजा गया है। इस आदेश पर भारत सरकार के संयुक्त सचिव जगन्नाथ श्रीनिवासन के हस्ताक्षर हैं। सरकार की ओर से जारी यह अधिसूचना अमित लाहोटी की हाई कोर्ट में नई जिम्मेदारी की आधिकारिक पुष्टि करती है।
दो साल तक अतिरिक्त न्यायाधीश के पद पर रहेंगे
अमित लाहोटी को हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश दो वर्ष के लिए बनाया गया है। यहां यह समझना जरूरी है कि उनका दो साल का कार्यकाल नियुक्ति की तारीख से नहीं, बल्कि पद का कार्यभार संभालने की तारीख से शुरू होगा। यानी जिस दिन अमित लाहोटी औपचारिक रूप से हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे, उसी दिन से उनके दो साल के कार्यकाल की गणना शुरू होगी। अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में वह हाई कोर्ट में आने वाले मामलों की सुनवाई और न्यायिक कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे।
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क्या होता है अतिरिक्त न्यायाधीश का पद?
हाई कोर्ट में जब न्यायाधीशों की संख्या कम होती है या मामलों का बोझ अधिक होता है, तब अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य अदालत में लंबित मामलों की संख्या को कम करना और न्यायिक कामकाज को बेहतर तरीके से चलाना होता है। अतिरिक्त न्यायाधीश भी हाई कोर्ट की पीठ का हिस्सा होते हैं और उन्हें न्यायिक मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी जाती है। इस तरह अमित लाहोटी की नियुक्ति से हाई कोर्ट में न्यायिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है।
हाई कोर्ट में लंबे समय से है मामलों का दबाव
देश के कई हाई कोर्ट में लंबे समय से बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। अदालतों में न्यायाधीशों के पद खाली होने के कारण भी मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है। एक ओर नए मामले लगातार अदालतों में पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने मामलों का निपटारा भी करना होता है। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से अदालत के पास मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त न्यायिक क्षमता उपलब्ध होती है। इससे लंबित मामलों के निपटारे में मदद मिल सकती है।
अमित लाहोटी की नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण?
अमित लाहोटी की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की उपलब्धता और लंबित मामलों को लेकर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति से अदालत के कामकाज को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी न्यायाधीश की नियुक्ति का वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह कब कार्यभार संभालते हैं और उन्हें किस तरह के मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी जाती है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी हुआ आदेश
हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश की नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होती है। इस मामले में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने नियुक्ति की अधिसूचना जारी की है। संविधान का अनुच्छेद 224 हाई कोर्ट में अतिरिक्त और कार्यवाहक न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित प्रावधान करता है। इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत अमित लाहोटी को दो साल की अवधि के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
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राजपत्र में भी प्रकाशित होगी अधिसूचना
केंद्र सरकार की ओर से जारी नियुक्ति आदेश को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित करने के लिए भी भेजा गया है। राजपत्र में सरकारी नियुक्तियों और महत्वपूर्ण आदेशों को आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया जाता है। इससे नियुक्ति संबंधी सरकारी आदेश सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाता है। इस प्रक्रिया के तहत अमित लाहोटी की नियुक्ति भी आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगी।
कार्यभार संभालने के बाद शुरू होगी नई जिम्मेदारी
अमित लाहोटी की नई जिम्मेदारी उनके पदभार ग्रहण करने के साथ शुरू होगी। कार्यभार संभालने के बाद वह हाई कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के साथ न्यायिक कार्य में शामिल होंगे। उन्हें अदालत में आने वाले मामलों की सुनवाई और उन पर निर्णय देने की जिम्मेदारी निभानी होगी। दो साल की निर्धारित अवधि के दौरान वह अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में अपने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
न्यायिक व्यवस्था के लिए क्या होगा फायदा?
हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध समय और न्यायिक क्षमता बढ़ सकती है। इससे विशेष रूप से लंबे समय से लंबित मामलों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद रहती है। हालांकि, केवल न्यायाधीशों की नियुक्ति से ही सभी लंबित मामलों का तुरंत समाधान संभव नहीं है। इसके लिए अदालतों में पर्याप्त स्टाफ, बेहतर व्यवस्था और प्रभावी सुनवाई प्रक्रिया भी जरूरी होती है।











