Naresh Bhagoria
11 Jan 2026
इंदौर के सराफा बाजार में सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। शहर की ज्वेलरी दुकानों में अब मास्क, हिजाब, नकाब या किसी भी तरह से चेहरा ढंककर आने वाले ग्राहकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इंदौर चांदी-सोना व्यापारी एसोसिएशन ने सभी व्यापारियों को लिखित निर्देश जारी कर यह स्पष्ट किया है कि गहनों की खरीदारी के दौरान ग्राहक को अपना चेहरा खुला रखना होगा।
सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम -
एसोसिएशन अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि यह कदम पूरी तरह सुरक्षा कारणों से उठाया गया है। व्यापारियों का तर्क है कि हाल के महीनों में देश के कई शहरों में सराफा दुकानों में लूट और ठगी की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें अपराधियों ने पहचान छिपाने के लिए मास्क या कपड़े से चेहरा ढंका हुआ था। सीसीटीवी फुटेज में पहचान न हो पाने से जांच में भी कठिनाई आती है। व्यापारियों का कहना है कि नए नियम से अपराधियों की पहचान आसान होगी, जांच प्रक्रिया तेज होगी और लूट जैसी वारदातों पर अंकुश लगेगा। साथ ही, स्टाफ और ग्राहकों दोनों में सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ेगा। हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन के दौरान दुकानों में सतर्कता भी अधिक रहेगी।
बिहार में नियम पहले हो चुका हैं लागू -
देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कदम उठाए जा चुके हैं या उनकी तैयारी चल रही है। बिहार में यह नियम पहले ही लागू हो चुका है, जबकि झारखंड में इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी और झांसी के सराफा बाजारों में भी बुर्का या मास्क पहनकर आने वाले ग्राहकों के प्रवेश पर रोक से जुड़े पोस्टर लगाए जा चुके हैं। हालांकि बिहार में इस फैसले के बाद विरोध भी देखने को मिला था और इसे लेकर राजनीतिक व सामाजिक बहस तेज हो गई थी।
निर्णय किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं
इंदौर के व्यापारी संगठनों ने साफ किया है कि यह निर्णय किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। वहीं, विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि इस तरह के नियम संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के विपरीत हैं और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। फिलहाल, इंदौर सराफा बाजार में इस नए नियम को लेकर व्यापारियों और ग्राहकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में यह फैसला सुरक्षा के लिहाज से कितना प्रभावी साबित होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।