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OBC Creamy Layer:सिर्फ इनकम से तय नहीं होगी क्रीमी लेयर, OBC रिजर्वेशन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के उस पत्र के पैरा 9 को अमान्य घोषित कर दिया, जिसमें बैंक, प्राइवेट सेक्टर या पीएसयू कर्मचारियों की सैलरी को क्रीमी लेयर में जोड़ने की बात कही गई थी।
सिर्फ इनकम से तय नहीं होगी क्रीमी लेयर, OBC रिजर्वेशन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि किसी भी उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में रखना या नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) का दर्जा देना केवल उसकी या उसके माता-पिता की आय के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए पद की स्थिति और अन्य मानकों को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    दो जजों की बेंच ने सुनाया फैसला

    यह फैसला जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने मद्रास, केरल और दिल्ली हाईकोर्ट के उन फैसलों को बरकरार रखा है जो सिविल सेवा परीक्षाओं में ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर के लाभ से जुड़े मामलों में दिए गए थे।

    सिर्फ सैलरी के आधार पर नहीं होगा क्रीमी लेयर का फैसला

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल आय देखकर नहीं किया जा सकता। 1993 के मूल दिशानिर्देशों के अनुसार उम्मीदवार के माता-पिता का पद, नौकरी की स्थिति और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।

    ग्रुप C और D कर्मचारियों की सैलरी नहीं जोड़ी जाएगी

    कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी उम्मीदवार के माता-पिता सरकारी सेवा में ग्रुप C या ग्रुप D (क्लास III या IV) में हैं, तो उनकी सैलरी को क्रीमी लेयर तय करने के लिए नहीं जोड़ा जाएगा। इसके अलावा कृषि से होने वाली आय को भी पूरी तरह बाहर रखा जाएगा।

    8 लाख रुपए की सीमा सिर्फ अन्य आय पर लागू

    क्रीमी लेयर तय करने के लिए परिवार की अन्य स्रोतों से होने वाली आय (जैसे बिजनेस, किराया, प्रॉपर्टी आदि) को ही देखा जाएगा। अगर यह आय तीन लगातार वर्षों में औसतन 8 लाख रुपए सालाना से कम है, तो उम्मीदवार को नॉन-क्रीमी लेयर का लाभ मिल सकता है।

    2004 के DoPT पत्र का एक हिस्सा रद्द

    सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के उस पत्र के पैरा 9 को अमान्य घोषित कर दिया, जिसमें बैंक, प्राइवेट सेक्टर या पीएसयू कर्मचारियों की सैलरी को क्रीमी लेयर में जोड़ने की बात कही गई थी। अदालत ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों और निजी या पीएसयू कर्मचारियों के बच्चों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

    हजारों OBC उम्मीदवारों को मिलेगी राहत

    यह फैसला उन हजारों ओबीसी उम्मीदवारों के लिए राहत लेकर आया है जिन्हें पहले केवल सैलरी के आधार पर क्रीमी लेयर मान लिया गया था और वे आरक्षण का लाभ नहीं ले पाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस फैसले को रेट्रोस्पेक्टिव यानी पिछली तारीख से लागू किया जाएगा।

    ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला :  पूर्व CJI को बचाने के लिए ₹1 करोड़ फीस मांगने वाली याचिका खारिज

    सरकार को दिए 6 महीने में लागू करने के निर्देश

    अदालत ने केंद्र सरकार और DoPT को इस फैसले को लागू करने के लिए 6 महीने का समय दिया है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पद (सुपरन्यूमरेरी पोस्ट्स) भी बनाए जा सकते हैं ताकि किसी अन्य कर्मचारी की सीनियरिटी प्रभावित न हो। आगे सिविल सेवा परीक्षा में जिला मजिस्ट्रेट या तहसीलदार द्वारा जारी वैध OBC-NCL प्रमाणपत्र को प्राथमिकता दी जाएगी और केवल सैलरी के आधार पर उम्मीदवारों को रिजेक्ट करने की प्रक्रिया खत्म की जाएगी।

    Sumit  Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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