इंदौर:मेट्रो स्टेशन के नाम बदलने में अटका पेंच, वीरांगनाओं के नाम पर रखने की मांग, रेवेन्यू मॉडल बना रुकावट

इंदौर मेट्रो का रेवेन्यू मॉडल शहर के मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने में बाधा बन रहा है। पिछले साल 31 मई 2025 को इंदौर मेट्रो की शुरुआत आम नागरिकों के लिए हुई थी। इससे पहले स्टेशन नामों को लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कड़ी आपत्ति जताते हुए दिल्ली तक नाम बदलने का मुद्दा उठाया था।
मेट्रो स्टेशन के नाम बदलने में अटका पेंच, वीरांगनाओं के नाम पर रखने की मांग, रेवेन्यू मॉडल बना रुकावट

शैलेन्द्र वर्मा, इंदौर। मेट्रो के स्टेशन नाम बदलने में रेवेन्यू मॉडल सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। मेट्रो प्रबंधन ने नामों के साथ संस्थानों के उपनाम जोड़कर आय बढ़ाने की योजना बनाई है। देश के अन्य शहरों में भी यही मॉडल लागू किया जा रहा है। विज्ञापन और ब्रांडिंग के जरिए मेट्रो संचालन का खर्च पूरा किया जा रहा है। वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर की जनता और जनप्रतिनिधियों की भावना को देखते हुए प्रदेश की वीरांगनाओं के नाम पर मेट्रो स्टेशन रखने का समर्थन किया था।

दिल्ली सहित अन्य शहरों में बिडिंग सिस्टम

मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने पांच स्टेशनों के नाम अस्थायी रूप से बदल दिए थे, लेकिन आधिकारिक दस्तावेजों में अब भी नोटिफाइड नाम ही दर्ज हैं। इसकी मुख्य वजह मेट्रो का रेवेन्यू मॉडल है। दरअसल, मेट्रो प्रबंधन ने नोटिफाइड नाम के साथ किसी संस्थान या प्रतिष्ठान का उपनाम जोड़कर राजस्व बढ़ाने की योजना बनाई है। दिल्ली सहित देश के अन्य शहरों में भी यही मॉडल लागू है। जिसके तहत जो संस्थान मेट्रो स्टेशन के साथ अपना नाम जोड़ना चाहता है। वह नीलामी में सबसे अधिक बोली लगाकर यह अधिकार प्राप्त करता है। मेट्रो संचालन के खर्च को पूरा करने के लिए इसे आवश्यक माना जा रहा है।

ये भी पढ़ें: Lungi Ngidi Injured : तेज गेंदबाज लुंगी एनगिडी सिर में चोट लगने से मैदान से बाहर, कैच लेने की कोशिश में गिरे

मेट्रो की आय का सोर्स हैं विज्ञापन 

मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के सूत्रों के अनुसार, इंदौर में 17.2 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है और स्टेशन भी बनकर तैयार हो चुके हैं। विज्ञापन से जुड़ी गाइडलाइन और अन्य प्रक्रियाएं जारी हैं। प्रत्येक स्टेशन पर कम से कम 3 और अधिकतम 6 दुकानों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा मेट्रो स्टेशन के बाहर, फुटओवर ब्रिज, सीढ़ियों और पिलरों पर भी विज्ञापन लगाए जाएंगे। करीब 17 किलोमीटर के इस कॉरिडोर में बने 14 मेट्रो स्टेशनों के नाम के साथ आगे उपनाम जोड़े जा सकते हैं। इससे मेट्रो को अतिरिक्त इनकम प्राप्त होगी।

इस तरह जोड़े जाते हैं उपनाम

उदाहरण के तौर पर वर्तमान में एससी-3 मेट्रो स्टेशन को 'टीसीएस मेट्रो स्टेशन' के नाम से जाना जा रहा है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अनुसार, इंदौर मेट्रो के संचालन के लिए भारी वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। चूंकि सार्वजनिक परिवहन का उद्देश्य आम नागरिकों से सीधे मुनाफा कमाना नहीं होता। इसलिए विज्ञापन और ब्रांडिंग मॉडल के जरिए ही इसके खर्च की भरपाई की जाती है। इसी कारण स्टेशनों के नाम के साथ उपनाम जोड़ने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है। यह मॉडल अन्य शहरों में भी सफल माना गया है।

ये भी पढ़ें: इंदौर में ‘मैरिज ब्यूरो’ की आड़ में ड्रग्स का खेल: महिला तस्कर सहित तीन गिरफ्तार

इन स्टेशनों नाम बदलने की मांग

गांधी नगर स्टेशन-देवी अहिल्याबाई होलकर टर्मिनल
सुपर कॉरिडोर 6 - महारानी लक्ष्मीबाई स्टेशन
सुपर कॉरिडोर 5 - रानी अवंती बाई लोधी स्टेशन
सुपर कॉरिडोर 4 - रानी दुर्गावती स्टेशन
सुपर कॉरिडोर 3 - रानी झलकारी बाई स्टेशन।

इन स्टेशनों के नाम बदलने की मांग लगातार उठ रही है। जनप्रतिनिधियों और आम जनता की ओर से इसे लेकर समर्थन भी मिल रहा है। हालांकि रेवेन्यू मॉडल के कारण फिलहाल इसमें अड़चन बनी हुई है। आने वाले समय में इस पर निर्णय लिया जा सकता है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

Latest Posts