इंदौर में भाजपा की मौन रैली, नेताओं ने याद किया बंटवारे का दर्द

इंदौर। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर इंदौर में भाजपा ने देश के बंटवारे के दौरान हुई त्रासदी और विस्थापन की पीड़ा को याद किया। इस अवसर पर एमवाय अस्पताल से भाजपा कार्यालय तक मौन रैली निकाली गई। रैली में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इसके बाद भाजपा कार्यालय में विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापित परिवारों को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि 1947 का विभाजन केवल देश का राजनीतिक बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाली मानवीय त्रासदी थी। उन्होंने कहा कि उस दौर की पीड़ा और संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि इतिहास के इस अध्याय को भुलाया न जाए।
मौन रैली में गूंजा बंटवारे का दर्द
भाजपा कार्यकर्ताओं ने एमवाय अस्पताल से भाजपा कार्यालय तक मौन रैली निकाली। रैली के दौरान विभाजन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद भाजपा कार्यालय में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने विभाजन के समय हुए विस्थापन, परिवारों के बिछड़ने और लोगों के संघर्ष का उल्लेख किया। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने विभाजन के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर, जमीन और कारोबार छोड़कर भारत आना पड़ा। उन्होंने कहा कि इतिहास के इस दर्दनाक दौर को आने वाली पीढ़ियों को समझना चाहिए।
‘लाशों से भरी ट्रेनों में भारत पहुंचे लोग’
कार्यक्रम के दौरान मीडिया से चर्चा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विभाजन की त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में पाकिस्तान में हिंदुओं और महिलाओं पर अत्याचार हुए। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोग ट्रेनों के जरिए भारत पहुंचे और कई ट्रेनें लाशों से भरी हुई थीं। विजयवर्गीय ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन विश्व इतिहास के सबसे बड़े मानवीय विस्थापनों में से एक था। लाखों लोगों को रातों-रात अपना घर छोड़ना पड़ा और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जल्दबाजी में विभाजन का निर्णय लिया और इसके बाद होने वाले बड़े पैमाने पर विस्थापन तथा पुनर्वास के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने राजनीतिक दलों से इतिहास की गलतियों से सीख लेने की अपील करते हुए कहा कि देश को तुष्टीकरण की राजनीति से दूर रहकर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
सिंधी, पंजाबी और बंगाली समाज ने झेली सबसे बड़ी पीड़ा
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि विभाजन का सबसे गहरा असर सिंधी, पंजाबी और बंगाली समाज पर पड़ा। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज के लोगों को अपनी मातृभूमि छोड़कर भारत आना पड़ा और यहां उन्होंने शून्य से अपना जीवन दोबारा खड़ा किया। लालवानी ने कहा कि पंजाब और बंगाल के विभाजन ने भी लाखों परिवारों को उजाड़ दिया। लोग अपना घर-बार, जमीन और पुराना जीवन छोड़कर अनजान जगहों पर पहुंचने को मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों ने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए भारत में अपना नया जीवन बनाया।
2021 से 14 अगस्त को मनाया जा रहा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
शंकर लालवानी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य देश के विभाजन के दौरान हुई घटनाओं, लोगों की पीड़ा और बलिदान को याद करना तथा नई पीढ़ी को उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है और विस्थापित परिवारों के संघर्ष को याद किया जा रहा है।
इतिहास की पीड़ा को याद कर दिया एकता का संदेश
इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि मानवीय पीड़ा के रूप में भी समझने की जरूरत है। नेताओं ने कहा कि लाखों लोगों ने विस्थापन और हिंसा का दर्द झेला, लेकिन उन्होंने संघर्ष करते हुए अपने जीवन को फिर से खड़ा किया।












