भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच!मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का टेस्ट कामयाब, ICBM को भी मार गिराने में सक्षम

नई दिल्ली। भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए अपनी रणनीतिक ताकत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून को लगातार तीन सफल फ्लाइट टेस्ट कर मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम और मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन किया। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे बड़े खतरों को भी हवा में नष्ट करने की क्षमता मौजूद है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए DRDO के वैज्ञानिकों और सशस्त्र बलों को बधाई दी।
24 घंटे में 3 सफल टेस्ट, दुनिया को दिखाई ताकत
DRDO ने महज 24 घंटे के भीतर तीन अलग-अलग फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए। इन परीक्षणों का मकसद लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और समुद्री खतरों के खिलाफ भारत की सुरक्षा क्षमता को परखना था। परीक्षण के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता के साथ निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। यह सिस्टम भविष्य में उभरने वाले मिसाइल खतरों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
भारत को क्या हासिल हुआ?
इन सफल परीक्षणों के बाद भारत अब उन देशों के विशेष समूह में शामिल हो गया है जिनके पास बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस की ऑपरेशनल क्षमता मौजूद है।
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देश |
ICBM इंटरसेप्शन क्षमता |
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अमेरिका |
हां |
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रूस |
हां |
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इजराइल |
हां |
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चीन |
हां |
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भारत |
हां |
यह उपलब्धि भारत की रणनीतिक सुरक्षा को कई गुना मजबूत करने वाली है।
क्या होती है ICBM?
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) दुनिया की सबसे खतरनाक और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों में गिनी जाती है।
ICBM की प्रमुख विशेषताएं-
- 5,500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला करने में सक्षम।
- एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंच सकती है।
- परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता।
- अंतरिक्ष की ऊंचाई तक जाकर लक्ष्य पर हमला करती है।
- बेहद तेज गति के कारण इसे रोकना मुश्किल माना जाता है।
इसी वजह से ICBM को किसी भी देश की सामरिक शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
कैसे काम करता है मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम?
मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का उद्देश्य दुश्मन की मिसाइल को उसके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले नष्ट करना होता है। इसकी कार्यप्रणाली-
1. खतरे की पहचान
अत्याधुनिक रडार दुश्मन की मिसाइल को लॉन्च होते ही ट्रैक करना शुरू कर देते हैं।
2. कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम
डेटा का विश्लेषण कर खतरे की गंभीरता का आकलन किया जाता है।
3. इंटरसेप्टर लॉन्च
इंटरसेप्टर मिसाइल को दुश्मन की मिसाइल की दिशा में भेजा जाता है।
4. हवा में विनाश
इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन की मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले हवा में ही नष्ट कर देती है।
क्यों खास है मल्टी-लेयर्ड डिफेंस?
इस सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है।
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सुरक्षा स्तर |
कार्य |
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Exo-Atmospheric |
वायुमंडल के बाहर मिसाइल को रोकना |
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Endo-Atmospheric |
वायुमंडल के भीतर मिसाइल को नष्ट करना |
अगर पहली सुरक्षा परत किसी कारण से लक्ष्य को नष्ट नहीं कर पाती, तो दूसरी परत सक्रिय होकर खतरे को खत्म करती है। यही वजह है कि, इसे मल्टी-लेयर्ड डिफेंस कहा जाता है।
किन मिसाइलों को रोक सकता है यह सिस्टम?
रक्षा सूत्रों के अनुसार परीक्षण की गई इंटरसेप्टर मिसाइलें 2,000 से 5,000 किलोमीटर की दूरी से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम हैं। भविष्य में यह क्षमता और बढ़ाए जाने की योजना है ताकि बड़े रणनीतिक खतरों का भी प्रभावी मुकाबला किया जा सके।
नौसेना को भी मिली नई ताकत
तीन परीक्षणों में केवल बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम ही शामिल नहीं था। DRDO ने पहली बार नेवल एंटी-शिप मिसाइल - मीडियम रेंज (NASM-MR) का सफल फ्लाइट टेस्ट भी किया।
यह मिसाइल-
- मध्यम दूरी पर मौजूद दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बना सकती है।
- समुद्री युद्ध क्षमता को मजबूत करेगी।
- भारतीय नौसेना की स्ट्राइक रेंज बढ़ाएगी।
इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।
चीन और पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है यह संदेश?
हाल के वर्षों में चीन और पाकिस्तान लगातार अपनी मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान फतेह-1 और फतेह-2 जैसी मिसाइलों का विकास कर रहा है, जबकि चीन के पास पहले से लंबी दूरी की मिसाइल तकनीक मौजूद है। ऐसे माहौल में भारत का यह मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम संभावित मिसाइल खतरों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
ओडिशा में हुए परीक्षण, खाली कराए गए 11 गांव
इन रणनीतिक परीक्षणों से पहले ओडिशा के बालासोर जिले स्थित चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। लॉन्च पैड के 3.5 किलोमीटर दायरे में आने वाले 11 गांवों से करीब 11,442 लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। परीक्षण सफल होने के बाद शाम तक सभी लोगों को वापस घर लौटने की अनुमति दे दी गई।











