Shivani Gupta
30 Nov 2025
भारत ने अपनी रक्षा क्षमता में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ते हुए बुधवार को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से अग्नि-5 इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफल परीक्षण किया। यह भारत की पहली और एकमात्र ICBM है, जो MIRV तकनीक (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) से लैस है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से एक ही मिसाइल कई अलग-अलग टारगेट्स पर वार कर सकती है।
अग्नि-5 की रेंज 5000 किलोमीटर है। इसका मतलब है कि यह पाकिस्तान, चीन और तुर्किये जैसे देशों तक आसानी से वार कर सकती है। मिसाइल डेढ़ टन तक न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी रफ्तार 29,401 किलोमीटर प्रति घंटा यानी मैक-24 है, जो आवाज की गति से 24 गुना अधिक है।
अग्नि-5 मिसाइल न केवल लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता रखती है, बल्कि इसमें 7500 किलोग्राम का बंकर बस्टर वॉरहेड भी लगाया जा सकता है। यह वॉरहेड जमीन में 100 मीटर गहराई तक जाकर दुश्मनों के न्यूक्लियर सिस्टम, रडार, कंट्रोल सेंटर और हथियार स्टोरेज को तबाह कर सकता है।
इस मिसाइल के लॉन्चिंग सिस्टम में कैनिस्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसकी वजह से इसे देश में कहीं भी आसानी से ट्रांसपोर्ट और तैनात किया जा सकता है। इस फीचर से अग्नि-5 को न सिर्फ सुरक्षित रखना आसान है बल्कि युद्ध की स्थिति में तुरंत इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से देश दुश्मनों के बंकर और भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने वाली मिसाइलें विकसित कर रहा है। पाकिस्तान और चीन ने सीमावर्ती इलाकों में गहरे भूमिगत बंकर और हथियारों के ठिकाने बना रखे हैं। ऐसे में अग्नि-5 जैसे हथियार उन दुश्मन ठिकानों को निशाना बनाने में अहम साबित होंगे।
अग्नि-5 की सबसे बड़ी खासियत इसका MIRV सिस्टम है। पारंपरिक मिसाइलें सिर्फ एक वॉरहेड ले जा सकती हैं, लेकिन MIRV तकनीक से लैस अग्नि-5 एक साथ कई वॉरहेड लेकर अलग-अलग जगहों पर वार कर सकती है। इसका मतलब है कि सैकड़ों किलोमीटर दूर मौजूद टारगेट्स को भी यह एक साथ नष्ट कर सकती है।