मध्य पूर्व में जारी तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में हालात और अधिक खतरनाक होने की आशंका जताई जा रही है। करीब दो हफ्तों से जारी इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए अपने मरीन कमांडो और युद्धपोतों को रणनीतिक क्षेत्रों में तैनात करना शुरू कर दिया है।
अमेरिका ने अपने शक्तिशाली एम्फिबीयस स्ट्राइक ग्रुप के तहत युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र की ओर भेजा है। यह जहाज समुद्र और जमीन दोनों जगह सैन्य अभियान चलाने में सक्षम है। इस बेड़े में करीब 2500 मरीन कमांडो शामिल हैं, जो तेज हमले और जमीनी लड़ाई करने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि-इस तैनाती से यह संकेत मिल रहा है कि-अमेरिका जरूरत पड़ने पर अपने पैदल सैनिकों को भी सीधे युद्ध में उतार सकता है।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक मरीन कमांडो के साथ 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को भी तैयार रखा गया है। यह यूनिट अचानक हमला करने और जल्द जवाबी कार्रवाई के लिए जानी जाती है। फिलहाल यूएसएस त्रिपोली जापान में तैनात है, लेकिन अनुमान है कि एक से दो हफ्तों के अंदर यह अमेरिका की सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में पहुंच जाएगा। इससे मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति और मजबूत हो जाएगी।
पश्चिम एशिया में पहले से ही अमेरिका के 50 हजार से ज्यादा सैनिक मौजूद हैं। नई सैन्य तैनाती के बाद वहां उसकी ताकत और बढ़ने की संभावना है। यूएसएस त्रिपोली के साथ गाइडेड मिसाइल क्रूजर यूएसएस रोबर्ट स्मॉल्स और डिस्ट्रॉयर यूएसएस राफेल पेराल्टा भी शामिल हैं। क्रूजर भारी हथियारों और हेलीकॉप्टर से लैस बड़े युद्धपोत होते हैं, जबकि डिस्ट्रॉयर जहाजों का मुख्य काम बेड़े की सुरक्षा करना और पनडुब्बियों के खिलाफ अभियान चलाना होता है।