‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ :CM डॉ. यादव बोले- उज्जैन का महत्व दुनिया के सामने, विद्वान तय करेंगे विश्व का स्टेंडर्ड टाइम क्या हो

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उज्जैन सिंहस्थ के लिए 19 किलोमीटर लंबे फोर लेन बायपास का भूमिपूजन भी किया, जिसकी लागत करीब 701 करोड़ रुपए होगी।
CM डॉ. यादव बोले- उज्जैन का महत्व दुनिया के सामने, विद्वान तय करेंगे विश्व का स्टेंडर्ड टाइम क्या हो
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ के जरिए उज्जैन को फिर से काल गणना के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में पहल शुरू हुई है। शुक्रवार को वसंत विहार स्थित तारामंडल परिसर में आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  ने कहा कि इस सेमिनार के माध्यम से देशभर और दुनिया से आए वैज्ञानिक यह विचार करेंगे कि भविष्य का वैश्विक स्टैंडर्ड टाइम क्या हो सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन का ऐतिहासिक महत्व एक बार फिर दुनिया के सामने आए और यहां से ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया जाए।

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    सम्मेलन में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मंथन

    इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद, शिक्षाविद और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणाली और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच तालमेल स्थापित करना है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश सोनी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहे।

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    उज्जैन प्राचीन काल से काल गणना का केंद्र- सोनी

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश सोनी ने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से ही काल गणना का केंद्र रहा है और इसे फिर से स्थापित करने के लिए शोध और संसाधनों को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने भारतीय पंचांग की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह हमें जीवन की लय और समय का सही उपयोग सिखाता है।

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    वहीं, धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारतीय विद्यार्थियों को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने उज्जैन की भौगोलिक और खगोलीय महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि अब लक्ष्य इसे ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ के रूप में विकसित करना है।

    विकास कार्यों की भी सौगात

    इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उज्जैन सिंहस्थ के लिए 19 किलोमीटर लंबे फोर लेन बायपास का भूमिपूजन भी किया, जिसकी लागत करीब 701 करोड़ रुपए होगी। इसके अलावा 22 करोड़ रुपए की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार की भी घोषणा की गई।

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    आधुनिक साइंस सेंटर बना आकर्षण का केंद्र

    तारामंडल परिसर में बनाए गए अत्याधुनिक साइंस सेंटर का भी उद्घाटन किया गया, जिस पर कुल 15.20 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसमें केंद्र सरकार ने 6.50 करोड़ और राज्य सरकार ने 8.56 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। इस सेंटर में छात्रों और शोधार्थियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे विज्ञान और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी।

    वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगम का मंच

    ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ सम्मेलन सिर्फ एक वैज्ञानिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान का संगम है। यह प्रयास उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर समय और खगोल विज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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