अशोक गौतम, भोपाल। राज्य में सड़क निर्माण को अधिक टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए अब आधुनिक तकनीकों और नवाचारों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। निर्माण प्रक्रिया में संशोधित बिटुमिन, जियो-टेक्सटाइल लेयर और सीमेंट ट्रीटेड बेस जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाएगा, ताकि सड़कों की औसत आयु बढ़े और बार-बार मरम्मत की जरूरत घटे। सरकार का लक्ष्य दीर्घकाल में रखरखाव पर होने वाले खर्च को कम करना है।

सूत्रों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेनेज डिजाइन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बारिश में जलभराव से होने वाली क्षति रोकी जा सके। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बहु-स्तरीय मॉनिटरिंग, लैब टेस्टिंग और थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य किए जा रहे हैं। जीपीएस आधारित निगरानी और ऑनलाइन प्रगति रिपोर्टिंग से निर्माण स्थल की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।

नई तकनीकों के सही उपयोग से सड़कों की औसत आयु 5 से 7 वर्ष से बढ़कर 10 से 15 वर्ष तक पहुंच सकती है। इन तकनीकों में गुणवत्ता का विशेष रूप से ध्यान देने पर ही सड़कों में मजबूती आती है और वाहनों के हादसे के मामले भी कम होते हैं।
बीपी पटेल, विशेषज्ञ और पूर्व चीफ इंजीनियर