बोतल और क्वार्टर की निकाली अर्थी!बालाघाट में महिलाओं ने निकाली शराब की अंतिम यात्रा

मध्य प्रदेश के बालाघाट में शराब दुकान हटाने को लेकर महिलाओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुढ़ी इलाके में स्थित शराब दुकान को हटाने की मांग पिछले एक महीने से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से महिलाओं में भारी नाराजगी है। रविवार देर शाम महिलाओं ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए शराब की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली और दुकान के सामने उसका दहन किया।
कंधों पर उठाई शराब की अर्थी
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने देसी शराब की बोतल, क्वार्टर और पवा के प्रतीकात्मक चित्रों से अर्थी तैयार की। इस अर्थी को महिलाओं ने अपने कंधों पर उठाकर पूरे वार्ड में घुमाया। आंदोलन के दौरान माहौल बिल्कुल किसी अंतिम यात्रा जैसा दिखाई दिया। आगे-आगे बाजे बज रहे थे और पीछे महिलाएं नारे लगाते हुए चल रही थीं। एक छोटा बच्चा हाथ में हंडी लेकर चल रहा था, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस अनोखे प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जुट गए।
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'अब सब्र खत्म हो रहा है'
महिलाओं का कहना है कि वे पिछले 35 दिनों से लगातार आंदोलन कर रही हैं, लेकिन प्रशासन और नेताओं ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप है कि सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। आंदोलन में शामिल महिलाओं ने कहा कि शराब दुकान रिहायशी इलाके में होने की वजह से परिवारों पर बुरा असर पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा।
सरकार पर लगाए बड़े आरोप
आंदोलनकारी महिलाओं ने सरकार पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार खुद को महिला हितैषी बताती है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। महिलाओं ने कहा कि वे दिन-रात धरने पर बैठी हैं, लेकिन न तो कोई बड़ा नेता उनसे मिलने आया और न ही प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया। इसी वजह से अब आंदोलन को और उग्र करने का फैसला लिया गया है।

नेताओं के वादों पर महिलाओं का गुस्सा
महिलाओं ने स्थानीय नेताओं के वादों को लॉलीपॉप बताया। उनका कहना है कि सिर्फ भरोसा दिया जाता है, लेकिन काम कुछ नहीं होता। बताया जा रहा है कि अप्रैल महीने में नगर पालिका अध्यक्ष ने शराब दुकान की जर्जर हालत की जांच कराने की बात कही थी। लेकिन मई महीने तक भी नगर पालिका के इंजीनियर दुकान का निरीक्षण करने नहीं पहुंचे। इस बात को लेकर महिलाओं में और ज्यादा नाराजगी बढ़ गई है। आंदोलन में शामिल सीमा उपलपवार ने कहा कि 35 दिनों से आंदोलन जारी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला।
जो दुकान हटाएगा, वोट उसी को मिलेगा
आंदोलनकारी महिलाओं ने साफ कहा कि जब तक शराब दुकान नहीं हटेगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले 2027 के चुनाव में वही उम्मीदवार उनका समर्थन पाएगा, जो इस शराब दुकान को हटवाएगा। महिलाओं का कहना है कि अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहती हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि इस मुद्दे पर पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।
आंदोलन स्थल पर शुरू किया स्वरोजगार
आंदोलन के बीच महिलाओं ने एक नई पहल भी शुरू की है। धरना स्थल पर महिलाएं बड़ी और पापड़ बनाने का काम कर रही हैं। उनका कहना है कि इससे वे आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रही हैं और आंदोलन के दौरान भी अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं।
महिलाओं की यह पहल इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे महिलाओं के संघर्ष और आत्मनिर्भरता का उदाहरण मान रहे हैं।
इलाके में बना चर्चा का माहौल
शराब दुकान को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुका है। महिलाओं का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक दुकान हटाने की नहीं, बल्कि अपने परिवार और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस आंदोलन पर क्या कदम उठाते हैं और महिलाओं की मांग कब तक पूरी होती है।











