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इंदौर:IET DAVV के छात्रों ने बनाया 'ब्रेलिएंट कीबोर्ड', सस्ती तकनीक से आसान होगी ब्रेल टाइपिंग

IET DAVV के छात्रों ने दृष्टिबाधितों के लिए एक किफायती और उपयोगी तकनीक विकसित करने का दावा किया है। 'ब्रेलिएंट कीबोर्ड' नाम का यह डिवाइस ब्रेल टाइपिंग को आसान बनाने के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच को भी सरल बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
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IET DAVV के छात्रों ने बनाया 'ब्रेलिएंट कीबोर्ड', सस्ती तकनीक से आसान होगी ब्रेल टाइपिंग
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रभा उपाध्याय, इंदौर 

    महंगे ब्रेल डिवाइस और जटिल तकनीक के कारण दृष्टिबाधित लोगों को डिजिटल दुनिया से जुड़ने में कठिनाई होती है। ऐसे में यह नया कीबोर्ड कम कीमत, आसान डिजाइन और पोर्टेबल तकनीक के साथ एक व्यवहारिक समाधान के रूप में सामने आया है। इस प्रोजेक्ट को श्रुति मिश्रा, उत्कर्ष शर्मा, कनिष्क सिंह राजपूत, सार्थक श्रीवास्तव और धवल मोरे ने तैयार किया है। डॉ. वैभव नीमा ने मेंटर के रूप में मार्गदर्शन दिया, इसी के साथ डीएवीवी इनक्यूबेशन सेंटर का सहयोग भी मिला। 

    ब्लूटूथ आधारित, हल्का और पोर्टेबल

    यह 'ब्रेलिएंट कीबोर्ड' ब्लूटूथ से संचालित डिवाइस है, जिसे मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर से आसानी से जोड़ा जा सकता है। इसमें 6-डॉट ब्रेल लेआउट दिया गया है, जो मॉर्डन ब्रेल प्रणाली पर आधारित है। 3D प्रिंटेड यह डिवाइस 300 ग्राम से कम वजन का है, जिससे इसे कहीं भी ले जाना आसान है। रिचार्जेबल बैटरी और ऑटो ऑन-ऑफ फीचर इसकी उपयोगिता को बढ़ाते हैं।

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    महंगे डिवाइस का सस्ता विकल्प

    बाजार में उपलब्ध ब्रेल डिवाइस जहां 40 हजार से 2 लाख रुपए तक के होते हैं, वहीं यह कीबोर्ड 75 से 85 प्रतिशत तक कम कीमत में उपलब्ध होने का दावा करता है। इसका सरल डिजाइन उपयोग करने वाले को कम समय में ब्रेल टाइपिंग सीखने में मदद करता है। ऑडियो और हैप्टिक फीडबैक से टाइपिंग ज्यादा सटीक बनती है और कम बटन प्रेस में शब्द टाइप हो जाते हैं।

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    प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

    बता दें कि इस प्रोजेक्ट को कई मंचों पर सराहना मिल चुकी है। टीम ने DAVV स्टार्टअप एक्सपो 2025, 'संवर्धन 3.0' कॉन्क्लेव और 'यूथ फॉर चेंज' सोशल समिट में पहला स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धियां इस नवाचार की उपयोगिता और संभावनाओं को दर्शाती हैं। छात्रों की यह टीम लगातार अपने प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने में जुटी हुई है।

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    उपयोग के बाद ही होगा असली मूल्यांकन

    नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के डेवलपमेंट ऑफिसर संजय लौवंशी के अनुसार, यह पहल सराहनीय है, लेकिन ठीक से एनालिसिस उपयोग के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल टीम इसे कमर्शियल स्तर पर तैयार करने में जुटी है। अगर यह बड़े स्तर पर सफल होता है, तो यह दृष्टिबाधितों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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