राजीव सोनी,भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब 22 फीसदी आबादी वाले जनजाति समाज को रिझाने भाजपा सहित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आनुषांगिक संगठनों की कवायद तेज हो गई है। प्रदेश में सत्ता की चाबी इसी वर्ग के हाथ में मानी जाती है। राम जन्मोत्सव के बहाने विश्व हिंदू परिषद ने प्रदेश में करीब 15 हजार स्थानों पर आदिवासी समाज की मौजूदगी में विशेष समरसता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 19 मार्च से 2 अप्रैल तक होने वाले इन कार्यक्रमों शबरी माता, निषाद राज और केवट से जुड़े प्रसंगों का खासतौर पर जिक्र किया जाएगा।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद विहिप ने राम नवमी पर जन्मोत्सव कार्यक्रमों को प्रमुखता से मनाने का सिलसिला शुरू किया है। प्रदेश में 19 मार्च से दो सप्ताह तक महाकोशल, मालवा और मध्यभारत प्रांत की करीब 15 हजार समितियों द्वारा रामनवमी मनाने की तैयारी की है। इनमें आदिवासी वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर है।
मप्र में 47 विस सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं जबकि कुल 80 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां ट्राइबल वोटर्स निर्णायक हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा को इस वर्ग की 31 सीटों पर सफलता मिली थी। प्रदेश में ट्राइबल का झुकाव जिस तरफ हो जाए सरकार उसकी ही बनती है। इसलिए भाजपा इस वर्ग को साधने के लिए पूरी ताकत से जुटी है।
जनजाति बहुल क्षेत्रों के अलावा बस्तियों में भगवान राम से जुड़े शबरी माता, निषाद राज और केवट प्रसंगों का गुणगान भी किया जाएगा। समरसता कार्यक्रमों में आदिवासी समाज के लोगों को प्रमुखता से बुलाने की योजना बनाई गई है।
वर्ष प्रतिपदा से चैत्र पूर्णिमा तक भव्य स्तर पर सामाजिक समरसता कार्यक्रम की तैयारी है। श्रीराम जन्मोत्सव कार्यक्रमों में अजजा वर्ग सहित समाज के सभी वर्गों की मौजूदगी रहेगी।
जितेंद्र सिंह चौहान, प्रांत सह मंत्री विहिप, मध्यभारत