उच्च शिक्षा विभाग की नई पहल :मिशन लाइफ से कॉलेजों में बढ़ेगा इको फ्रेंडली कल्चर

उच्च शिक्षा विभाग की इस नई पहल मिशन लाइफ से कॉलेजों में केवल व्याख्यान और परीक्षाएं ही नहीं होंगी, बल्कि छात्र प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीने की कला भी सीखेंगे। इससे प्रदेश के विश्वविद्यालय इको-फ्रेंडली' जीवनशैली से पहचान बनाएंगे।
मिशन लाइफ से कॉलेजों में बढ़ेगा इको फ्रेंडली कल्चर
AI जनरेटेड सारांश
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    हर्षित चौरसिया, जबलपुर। प्रदेशभर के कॉलेजों की तस्वीर मिशन लाइफ से बदलने को लेकर कवायद की जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग की इस नई पहल से कॉलेजों में केवल व्याख्यान और परीक्षाएं ही नहीं होंगी, बल्कि छात्र प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीने की कला भी सीखेंगे। बताया जाता है कि उच्च शिक्षा विभाग ने 'मिशन लाइफ' के तहत एक विस्तृत कार्ययोजना लागू की है, जिसका उद्देश्य परिसरों को पूरी तरह से 'ग्रीन और सस्टेनेबल' बनाना है।

    हर कॉलेज में होगा ई-वेस्ट बैंक, बिजली की होगी भारी बचत

    इस मुहिम के तहत कॉलेजों की सूरत बदलने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। अब हर कॉलेज कैंपस में एक ई-वेस्ट बैंक होगा, जहां खराब इलेक्ट्रॉनिक कचरे को इधर-उधर फेंकने के बजाय सुरक्षित तरीके से रीसाइकिल किया जाएगा। साथ ही, पुराने बल्बों और पंखों की जगह ऊर्जा-दक्ष स्टार-रेटेड उपकरण लगाए जाएंगे, जिससे बिजली की भारी बचत होगी।

    कचरे से खाद और पोषण वाटिका का होगा निर्माण

    कॉलेजों में अब कचरा प्रबंधन केवल कागजों पर नहीं होगा। कैंपस के गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग परिसर में ही पोषण वाटिका विकसित करने में होगा। इन वाटिकाओं में तुलसी, आंवला और गिलोय जैसे औषधीय पौधे लगाए जाएंगे, जो छात्रों को आयुर्वेद और प्रकृति से जोड़ेंगे।

    प्लास्टिक मुक्त और जल-साक्षर बनेंगे छात्र

    नए निर्देशों के अनुसार, कॉलेजों को सिंगल-यूज प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। छात्रों को स्टील की बोतलों और घर के बने भोजन के लिए प्रेरित करने वेस्ट-फ्री लंचबॉक्स वीक जैसे नवाचार किए जाएंगे। यही नहीं, छात्र अब अपने कैंपस का वाटर मैप तैयार करेंगे ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके और जल संचयन के नए स्रोत विकसित किए जा सकें।

    पर्यावरण के प्रति जागरूक भी होंगे

    उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि जब छात्र कॉलेज से डिग्री लेकर निकलेंगे, तो वे न केवल एक स्नातक होंगे, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूक एक जिम्मेदार नागरिक भी होंगे। इसके लिए विभाग से विभिन्न गतिविधियों को आयोजित कराने के लिए निर्देशित किया गया है। 

    प्रो. अलकेश चतुर्वेदी, प्राचार्य, लीड कॉलेज, जबलपुर

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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