बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल संगठन तेजी से कमजोर होता दिखाई दे रहा है। टॉप नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा के मारे जाने के बाद अब उसका सबसे भरोसेमंद साथी और PLGA बटालियन-1 का कमांडर बारसे देवा भी सरेंडर की तैयारी में है। यह कदम नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, सुकमा क्षेत्र में देवा के सरेंडर के लिए सुरक्षित कॉरिडोर तैयार किया गया है। माना जा रहा है कि वह जल्द ही जंगल छोड़कर आत्मसमर्पण कर सकता है। एक समय बस्तर में नक्सलियों की 7 डिवीजन और 15 एरिया कमेटियां सक्रिय थीं। लेकिन लगातार पुलिस कार्रवाई के बाद इनमें से कई अब खत्म हो चुकी हैं। अगर देवा आत्मसमर्पण करता है तो लगभग नक्सल संगठन खत्म होने की कगार पर आ जाएगा।
बता दें कि, 18 नवंबर को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में पुलिस एनकाउंटर में टॉप नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा मारा गया था। हिड़मा नक्सल संगठन को बस्तर के नेटवर्क से जोड़ने वाली मुख्य कड़ी था। उसकी मौत के बाद संगठन में बड़े स्तर पर टूटने की स्थिति बनी हुई है। यह सुरक्षा बलों की एक बड़ी जीत है।
हिड़मा और बारसे देवा दोनों सुकमा जिला के पूवर्ती गांव के निवासी हैं। दो साल पहले जब हिड़मा सेंट्रल कमेटी में शामिल हुआ था, तब उसने ही देवा को PLGA बटालियन नंबर-1 का कमांडर बनाया था।
PLGA बटालियन-1 को नक्सलियों की सबसे खतरनाक सैन्य इकाई माना जाता था। इसी बटालियन ने टेकलगुड़े, बुरकापाल और मिनपा जैसे बड़े हमले किए थे। लेकिन अब लगातार पुलिस दबाव और एनकाउंटर के कारण यह बटालियन लगभग टूट चुकी है।
कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा पूवर्ती गांव पहुंचे थे। उन्होंने वहां हिड़मा और देवा की मां से मुलाकात की और देवा को आत्मसमर्पण करने की अपील पहुंचाई थी। बता दें कि, बारसे देवा के आत्मसमर्पण के बाद बस्तर में नक्सल आंदोलन को सबसे बड़ा नुकसान होगा और सुरक्षा बलों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में दर्ज होगा।