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लाइफस्टाइल डेस्क। आजकल सोशल मीडिया पर फिटनेस और वेट लॉस से जुड़े कंटेंट की भरमार है। हाई-प्रोटीन डाइट, प्रोटीन शेक और सप्लीमेंट्स को सेहत के लिए सुपरफूड माना जा रहा है। खासकर महिलाएं तेजी से इस ट्रेंड को फॉलो कर रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि, क्या जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेना वाकई फायदेमंद है या इससे सेहत को नुकसान भी हो सकता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रोटीन जरूरी जरूर है, लेकिन संतुलन बेहद जरूरी है।
प्रोटीन शरीर का एक अहम पोषक तत्व है। यह मसल्स, हड्डियों और टेंडन को मजबूत बनाता है, टिश्यू रिपेयर में मदद करता है और इम्यूनिटी को बेहतर बनाता है। पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है, जिससे ओवरईटिंग से बचाव होता है।
अमेरिका की वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी की न्यूट्रिशन प्रोफेसर और रजिस्टर्ड डायटीशियन लिंडसे मैलोन के अनुसार, बॉडीबिल्डर न होने के बावजूद हर व्यक्ति को रोजाना शरीर की मरम्मत और ग्रोथ के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है।
डाइट एक्सपर्ट केली जोन्स के मुताबिक, महिलाओं को अपने शरीर के वजन के हिसाब से 1.75 से 1.80 ग्राम प्रति किलो प्रोटीन लेना चाहिए। इससे लंबे समय तक मसल्स, हड्डियां और मेटाबॉलिज्म स्वस्थ रहते हैं। जो महिलाएं नियमित एक्सरसाइज करती हैं, खेलकूद में सक्रिय हैं या मसल्स गेन करना चाहती हैं, वे 2 ग्राम प्रति किलो तक प्रोटीन ले सकती हैं।
इसके अलावा, डिलिवरी के बाद ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को भी सामान्य से अधिक प्रोटीन की जरूरत होती है, क्योंकि यह रिकवरी और दूध के उत्पादन में मदद करता है। पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान भी शरीर की प्रोटीन जरूरत बढ़ जाती है।
जहां प्रोटीन की कमी से थकान, मूड स्विंग्स और एनर्जी की कमी हो सकती है, वहीं इसका ज्यादा सेवन भी शरीर के लिए ठीक नहीं है। न्यूयॉर्क की डायटीशियन ब्रिगिट जाइट्लिन बताती हैं कि अत्यधिक प्रोटीन लेने से डाइजेशन स्लो हो सकता है। इसका असर सबसे पहले पेट पर दिखाई देता है। कब्ज, सूजन और पेट साफ न होने की समस्या आम हो जाती है। लंबे समय तक ज्यादा प्रोटीन लेने से हार्ट डिजीज और किडनी से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
डाइट एक्सपर्ट केट रेगन के अनुसार, अगर शरीर जरूरत से ज्यादा प्रोटीन ले रहा है तो वह खुद संकेत देने लगता है। इनमें शामिल हैं-
कुछ लक्षण उसी दिन नजर आने लगते हैं, जबकि किडनी स्टोन और हार्ट डिजीज जैसी समस्याएं धीरे-धीरे विकसित होती हैं।
महिलाओं को प्रोटीन के लिए सप्लीमेंट पर निर्भर रहने की बजाय प्राकृतिक और संतुलित डाइट अपनानी चाहिए।
अंडे को कम्प्लीट प्रोटीन माना जाता है, जिसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड होते हैं।
दही, छाछ और पनीर पाचन को बेहतर रखते हैं और प्रोटीन की कमी भी पूरी करते हैं।
दालें और फलियां जैसे मूंग, मसूर, राजमा और छोले शाकाहारी महिलाओं के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।
चिकन और मछली लीन प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। मछली में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।
सोयाबीन और टोफू वेजिटेरियन महिलाओं के लिए प्रोटीन का पावरहाउस हैं।
नट्स और सीड्स जैसे बादाम, अखरोट और कद्दू के बीज स्नैक के रूप में भी अच्छे विकल्प हैं।
अगर आपको लगता है कि, आप जरूरत से ज्यादा प्रोटीन ले रही हैं और 24 घंटे से अधिक समय तक डाइजेशन या अन्य लक्षण बने हुए हैं, तो डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह जरूर लें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, प्रोटीन कम करते समय कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट और फाइबर को डाइट में संतुलित रखना बेहद जरूरी है।