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Peoples Update Special :बिरयानी का इतना शौक कि घर छोड़कर हैदराबाद के लिए निकल पड़ा टीनएजर

हैदराबाद की बिरयानी की चाह में देवास जिले के एक बालक ने घर छोड़ दिया। दरअसल उसने बिरयानी पर 3500 रुपए खर्च कर दिए थे। घर में डांट के डर के कारण वह ट्रेन में बैठकर निकल पड़ा। चाइल्ड लाइन पर सूचना के बाद उसे रेस्क्यू किया गया।
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बिरयानी का इतना शौक कि घर छोड़कर हैदराबाद के लिए निकल पड़ा टीनएजर
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पल्लवी वाघेला, भोपाल। हैदराबादी बिरयानी हर जगह मशहूर है, लेकिन इसकी चाह में एक टीनएजर (13 साल)  ने घर छोड़ने का कदम उठा लिया। बच्चा देवास के पास से दिल्ली जाने के लिए निकला था, ताकि आगे हैदराबाद जा सके। उसने कहा कि बिरयानी की चाह में वह घर में रखे 3500 रुपए खर्च कर चुका था और डर था घर पर पता लगने पर मार पड़ेगी। उसने सोचा कि बेहतर है हैदराबाद में बस जाए। चाइल्ड हेल्पलाइन पर पहुंचे कॉल के बाद बच्चे को रेस्क्यू किया गया।

    माता-पिता थे बाहर

    रेस्क्यू होने के बाद बच्चा लगातार कई कहानियां बनाता रहा। उसके पास करीब पांच हजार रुपए मिले। इसके बारे में पूछने पर बच्चे ने कहा कि वह बीमार है और अपनी दवा लेने के लिए पैसे लेकर घर से निकला था। बमुश्किल बच्चे ने इस बात का खुलासा किया कि वह हैदराबाद बसने की चाह में घर से निकला है साथ ही बिरयानी से लगाव की दिलचस्प दास्तान भी बाहर आई। बच्चे ने बताया कि पिता ठेकेदारी का काम करते हैं, इस बार उनकी तबीयत ठीक नहीं थी तो मां 15 दिन के लिए उनके पास चली गई। दादी का बनाया खाना उसने नहीं खाया और घर के पास की एक हैदराबादी बिरयानी की दुकान से बिरयानी लाकर खाता रहा।

    घर का खाना फेंककर रोज ऑर्डर करता था बिरयानी

    वहां से वह रोज बिरयानी ऑर्डर करता और दादी का बनाया खाना फेंककर बिरयानी खाता था। अब उसे पता चला कि मम्मी-पापा आने वाले हैं तो उसे डर लगने लगा। दूसरी ओर बिरयानी का चाव भी खत्म नहीं हो रहा था। इसलिए उसने यह कदम उठाया। मामले में पिता ने बताया कि उन्हें और बच्चे की दादी को अंदाजा ही नहीं था कि वह रोज पैसा बिरयानी में खर्च कर रहा था। पिता ने कहा कि उन्होंने थाने में शिकायत भी की थी। बच्चे को परिवार को सौंप दिया गया है।

    काल्पनिक दुनिया में जीते हैं बच्चे 

    वर्तमान में मोबाइल और अन्य बाहरी एक्सपोजर के कारण बच्चे काल्पनिक दुनिया में जीते हैं। इस मामले में भी बच्चे को लगा कि उसके लिए हैदराबाद में रहकर सर्वाइव करना ज्यादा आसान है। जरूरी है कि बच्चों को सचेत करें कि घर से बाहर की दुनिया उतनी आसान नहीं है।

    डॉ. दीप्ति सिंघल, काउंसलर 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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