संतोष चौधरी, भोपाल। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में जहां दो हफ्ते पहले तक महंगी शराब बिकने को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं, वहीं अब इस वित्तीय वर्ष में शराब ठेकों की अवधि समाप्त होने के पहले प्रदेश में सस्ती शराब की खुली बिक्री शुरू हो गई है। भोपाल, देवास, नर्मदापुरम सहित एक दर्जन से अधिक शहरों में शराब 30 से 50 फीसदी तक छूट पर बेची जा रही है।
भोपाल में एक सिंडीकेट द्वारा शराब पर 50 प्रतिशत तक डिस्काउंट दिया जा रहा है। कई दुकानों पर शराब लागत मूल्य पर या एक बोतल के साथ एक फ्री बिक रही है। 31 मार्च तक ठेके खत्म होने से एक सप्ताह पहले तक सस्ती शराब बिकती थी, लेकिन इस बार डेढ़-दो माह पहले से भावों में भारी गिरावट कर दी गई है। आबकारी के जानकारों का कहना है कि लाइसेंस समाप्त होने से पहले सस्ती शराब की यह बिक्री भले ही कागजों में सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचा रही हो, लेकिन यह आबकारी नीति की साख, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और सामाजिक संतुलन-तीनों को कमजोर कर रही है।
आबकारी नीति 2025-26 में स्पष्ट लिखा है कि शराब की बिक्री MRP से अधिक और MSP से कम दर पर नहीं की जा सकती। सस्ती शराब के पीछे असली वजह आबकारी नीति का वही प्रावधान है। राजधानी के एक ठेकेदार के मुताबिक, उन्हें हर माह कम से कम 85 प्रतिशत स्टॉक उठाना अनिवार्य है। तय मात्रा नहीं उठाने पर भारी पेनॉल्टी लगती है। नतीजतन लाइसेंस अवधि के अंतिम महीनों में बचे हुए स्टॉक को किसी भी कीमत पर निकालना उनकी मजबूरी होती है।
MRP या MSP से कम दर पर शराब बिक्री पर कार्रवाई करने का अधिकार आबकारी विभाग के पास है। भोपाल में ही मौजूदा वित्तीय वर्ष में 14 ठेकेदारों पर प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इनमें 13 में MRP से ज्यादा और एक में MSP से कम पर शराब बेची जा रही थी। इनमें कार्रवाई भी की गई है।
जिन जिलों या शहरों में ठेकेदारों ने आपस में सिंडिकेट बना लिया है, वहां शराब सीमित छूट पर ही बेची जा रही है। जहां सिंडिकेट नहीं है, वहां आपसी प्रतिस्पर्धा ने शराब को बेहद सस्ता कर दिया है। भोपाल में दो बड़े समूह सक्रिय हैं, जिनमें से एक समूह के पास 62 और दूसरे के पास 25 दुकानें हैं।
आबकारी विभाग से सालाना 14 हजार करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलता है। भोपाल जिले में मौजूदा वित्तीय वर्ष में शराब का ठेका करीब 1100 करोड़ रुपए में गया है। नए वित्तीय वर्ष में राजस्व आय का टारगेट 19,000 करोड़ संभावित है।
MRP से ज्यादा और MSP से कम पर शराब बेचना नीति के खिलाफ है। इसके लिए शराब दुकानों की नियमित जांच कराते हैं और लगातार कार्रवाई भी की जाती है। कई मामलों में प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।
अभिजीत अग्रवाल, आबकारी आयुक्त