मौत बनकर झूल रहे बिजली और केबल के तार, हादसे का इंतजार कर रहे जिम्मेदार

इंदौर। हवा बंगला क्षेत्र स्थित कुंदन नगर गली नंबर-8 में नीचे झूल रही बिजली और केबल लाइनें रहवासियों के लिए जानलेवा खतरा बन चुकी हैं। सड़क के ऊपर लटक रहे तारों में आए दिन वाहन फंस रहे हैं, लेकिन नगर निगम और बिजली विभाग अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
रहवासियों के अनुसार कॉलोनी की कई गलियों में बिजली और केबल के तार सामान्य ऊंचाई से काफी नीचे लटक रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक किसी तरह निकल जाते हैं, लेकिन जैसे ही कोई चारपहिया या मालवाहक वाहन आता है, तार उसमें उलझ जाते हैं। कई बार वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को सड़क पर उतरकर खुद ही केबल हटानी पड़ती है ताकि यातायात सुचारु हो सके।
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बच्चों और राहगीरों पर मंडरा रहा खतरा
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सबसे अधिक चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। कॉलोनी की गलियों में बच्चे रोजाना खेलते हैं और कई स्थानों पर तार इतने नीचे झूल रहे हैं कि कोई भी बच्चा आसानी से उन्हें छू सकता है। बारिश के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। यदि किसी तार में करंट प्रवाहित हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है।रहवासियों ने बताया कि कई घरों के बाहर लगे बिजली मीटर, केबल बॉक्स और वायरिंग भी अव्यवस्थित स्थिति में हैं। कहीं खुले तार दिखाई देते हैं तो कहीं केबल जमीन से कुछ ही फीट ऊपर लटक रही है। इसके बावजूद संबंधित विभाग समस्या की अनदेखी कर रहे हैं।
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कई बार शिकायत, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम और बिजली विभाग को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थायी समाधान नहीं किया। लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगे।
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बिजली अधिकारी का विवादित बयान
मामले में बिजली विभाग के सहायक यंत्री (एई) रमाकांत केलकर ने कहा कि संबंधित कॉलोनी अवैध है, इसलिए वहां विद्युत मंडल सीधे काम नहीं कर सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि रहवासी निजी इलेक्ट्रिशियन बुलाकर बांस-बल्ली के सहारे तारों को ऊंचा करवा लें। जब उनसे पूछा गया कि यदि किसी दिन बड़ा हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इस पर उन्होंने कहा, "नाले के किनारे रहने वालों को भी पता होता है कि बारिश में बाढ़ आएगी। जब कोई योजना आएगी, तब कार्रवाई की जाएगी।"












