खुद बैंक लोन के लिए खाए थे ठोकरें, अब 150 से ज्यादा लोगों को दिला चुके हैं रोजगार की राह; ग्वालियर के राजीव जैन बने मिसाल

राजीव कटारे, ग्वालियर। कहते हैं कि जिंदगी की मुश्किलें इंसान को या तो तोड़ देती हैं या फिर उसे दूसरों का सहारा बनना सिखा देती हैं। ग्वालियर के युवा कारोबारी राजीव जैन ने दूसरा रास्ता चुना। कभी अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए बैंक लोन लेने में उन्हें खुद कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था। बैंकों की जटिल प्रक्रियाओं, कागजी औपचारिकताओं और सही मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें लंबे समय तक भटकना पड़ा। उसी संघर्ष ने उनके भीतर यह संकल्प पैदा किया कि जिस परेशानी से वे गुजरे हैं वह किसी और जरूरतमंद को न झेलनी पड़े। आज यही सोच उन्हें ग्वालियर में सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद का दूसरा नाम बना चुकी है। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने 150 से अधिक बेरोजगार युवाओं, बेसहारा महिलाओं और छोटे दुकानदारों को बैंक लोन दिलाने में मदद की है। उनके प्रयासों से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बदली है और लोगों को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला है।

संघर्ष ने बदली सोच, दूसरों का सहारा बनने का लिया संकल्प
राजीव जैन बताते हैं कि जब उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाने का फैसला किया तब बैंक से लोन लेना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। हर बार नए दस्तावेज मांगे जाते थे और प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि कई बार निराशा हाथ लगी। सही जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें कई कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। इसी अनुभव ने उन्हें यह एहसास कराया कि ऐसे न जाने कितने युवा होंगे, जिनके पास हुनर तो है लेकिन बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण वे अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग प्रणाली को गहराई से समझा और बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों की मदद करने का फैसला किया।
5 साल में 150 से ज्यादा लोगों को दिलाया बैंक लोन
राजीव जैन पिछले पांच वर्षों से लगातार ऐसे लोगों की मदद कर रहे हैं जो रोजगार शुरू करना चाहते हैं लेकिन बैंक लोन की प्रक्रिया में अटक जाते हैं। उन्होंने अब तक 150 से अधिक बेरोजगार युवाओं, महिलाओं और छोटे कारोबारियों को बैंक लोन दिलाने में सहयोग किया है। उनकी मदद से कई लोगों ने ई-रिक्शा खरीदे, छोटी दुकानें शुरू कीं, पुराने कारोबार का विस्तार किया और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए। राजीव का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति को सही समय पर सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वह अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
रोजगार ही नहीं, समाज सेवा में भी निभा रहे जिम्मेदारी
राजीव जैन का सामाजिक कार्य केवल बैंक लोन तक सीमित नहीं है। वे समाज के हर उस वर्ग तक पहुंचने का प्रयास करते हैं, जहां मदद की जरूरत होती है। भीषण गर्मी के दौरान जब उन्होंने जयारोग्य अस्पताल समूह के कमलाराजा अस्पताल में नवजात शिशुओं और प्रसूताओं को गर्मी से परेशान देखा, तो उन्होंने बिना देर किए वहां कूलरों की व्यवस्था कराई। उनका उद्देश्य था कि अस्पताल में भर्ती मासूम बच्चों और उनकी माताओं को गर्मी से राहत मिल सके। इसके अलावा वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई में भी सहयोग कर रहे हैं। जरूरतमंद विद्यार्थियों को कॉपी-किताबें उपलब्ध कराकर उनकी शिक्षा में आने वाली आर्थिक बाधाओं को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
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मदद पाने वालों ने बताया कैसे बदली जिंदगी
राजीव जैन की मदद से आत्मनिर्भर बने लोग आज उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं। मुकेश प्रजापति बताते हैं कि ई-रिक्शा खरीदने के लिए उन्होंने कई बार बैंक से लोन लेने की कोशिश की, लेकिन हर बार उनसे नए-नए दस्तावेज मांगे जाते थे। इससे वे काफी निराश हो चुके थे। बाद में उनकी मुलाकात राजीव जैन से हुई। राजीव ने पूरी प्रक्रिया समझाई और बैंक लोन दिलाने में हर संभव सहयोग किया। आज वे अपना ई-रिक्शा चलाकर सम्मानपूर्वक परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
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समाज के लिए प्रेरणा बन चुके हैं राजीव जैन
राजीव जैन की पहल यह साबित करती है कि अगर कोई व्यक्ति अपने संघर्षों से सीख लेकर दूसरों की मदद करने का संकल्प ले, तो वह सैकड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकता है। बैंक लोन दिलाने से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग तक उनके प्रयास लगातार समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। आज ग्वालियर में राजीव जैन केवल एक कारोबारी नहीं बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन चुके हैं जो मेहनत तो करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों और सही मार्गदर्शन के अभाव में पीछे रह जाते हैं। उनकी यह नि:स्वार्थ सेवा कई परिवारों के जीवन में नई रोशनी लेकर आई है और दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।












