चुनावों की तैयारी :कांग्रेस ने यूपी, हरियाणा और ओडिशा में बदले प्रभारी, संजय दत्त हरियाणा, राजेंद्र गौतम यूपी के प्रभारी

नई दिल्ली। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा के लिए नए एआईसीसी प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। नए आदेश के अनुसार राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश, लालजी देसाई को ओडिशा और संजय दत्त को हरियाणा का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी और संबंधित नेता अब अपने-अपने राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालेंगे।
पुराने प्रभारियों के योगदान को भी सराहा
नए बदलावों के साथ कांग्रेस ने पूर्व प्रभारियों के काम की भी खुलकर सराहना की है। पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे अविनाश पांडे के योगदान की प्रशंसा की गई। इसके अलावा बीके हरिप्रसाद और अजय कुमार लल्लू के संगठनात्मक प्रयासों को भी सराहा गया। कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि नए प्रभारियों का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और चुनावी तैयारियों को गति देना होगा।
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राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति के मायने
उत्तर प्रदेश में राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। दिल्ली सरकार में मंत्री रह चुके गौतम वर्तमान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष भी हैं। अनुसूचित समाज में उनकी मजबूत पहचान को देखते हुए माना जा रहा है कि कांग्रेस ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है। पार्टी राज्य में अपने जनाधार को मजबूत करने के साथ-साथ दलित मतदाताओं के बीच प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
सोशल इंजीनियरिंग पर कांग्रेस का नया दांव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही कांग्रेस अब सोशल इंजीनियरिंग के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। वहीं, हरियाणा और ओडिशा में भी नए प्रभारियों की तैनाती को संगठन विस्तार और स्थानीय स्तर पर पार्टी को अधिक सक्रिय बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की चुनौती
अब सबसे बड़ी चुनौती नए प्रभारियों के सामने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना होगी। देखना यह है कि बदलाव उत्तर प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को कितना मजबूत करता है और पार्टी को कितना लाभ दिला पाता है।












