इंदौर में ‘पीएम ई-बस सेवा’ की शुरुआत:आई-14 रूट पर 10 इलेक्ट्रिक बसों का ट्रायल रन शुरू

इंदौर। शहर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शनिवार से केंद्र सरकार की ‘पीएम ई-बस सेवा’ योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया। पहले चरण में आई-14 रूट पर 10 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का तकनीकी एवं व्यावसायिक ट्रायल रन शुरू किया गया है। यह बसें राऊ रंगवासा से रणजीत हनुमान, राजवाड़ा, बंगाली चौराहा होते हुए कनाड़िया बायपास तक संचालित की जाएंगी।
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अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) के अनुसार केंद्र सरकार की इस योजना के तहत इंदौर को कुल 150 आधुनिक इलेक्ट्रिक बसें मिली हैं। फिलहाल 10 बसों के ट्रायल के साथ शुरुआत की गई है। आगामी दिनों में चरणबद्ध तरीके से सभी बसों को विभिन्न रूटों पर संचालित किया जाएगा। नई बसें करीब 9 मीटर लंबी, पूरी तरह वातानुकूलित (एसी) और पर्यावरण अनुकूल हैं। इनका उद्देश्य प्रदूषण कम करने के साथ यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
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बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और लाइव मॉनिटरिंग की सुविधा दी गई है। सभी कैमरों की फुटेज सीधे सेंट्रल कंट्रोल रूम से देखी जा सकेगी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।बसों के संचालन, लोकेशन ट्रैकिंग और समय प्रबंधन के लिए इंटेलिजेंट ट्रांजिट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगाया गया है। इसकी निगरानी एआईसीटीएसएल कार्यालय और नायता मुंडला डिपो स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से की जाएगी।
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कैशलेस यात्रा को बढ़ावा देने के लिए बसों में डिजिटल फेयर कलेक्शन सिस्टम लागू किया गया है, जिससे यात्री डिजिटल माध्यम से किराया भुगतान कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था में पारंपरिक ड्राइवर और कंडक्टर के स्थान पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त ‘कोच कैप्टन’ और ‘डिजिटल असिस्टेंट’ यात्रियों की सेवा करेंगे। दोनों वर्दीधारी कर्मचारी बस संचालन के साथ यात्रियों को आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराएंगे।
दिव्यांग यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों में व्हीलचेयर असिस्टेंस सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे उन्हें बस में चढ़ने और उतरने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। एआईसीटीएसएल ने बताया कि भविष्य में इन इलेक्ट्रिक बसों का संचालन केवल शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के कस्बों, गांवों और पेरी-अर्बन क्षेत्रों तक भी इसका विस्तार किया जाएगा। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।












