निगम की 'पीली गैंग' बनी असुर: जब बेजुबानों पर ढा रहे ऐसा कहर, तो आम जनता का क्या होगा?

इंदौर। नगर निगम की बदनाम 'पीली गैंग' के अमानवीय कारनामे एक बार फिर कैमरे में कैद हुए हैं, जिसने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आए दिन आम जनता के साथ जानवरों जैसा सलूक करने वाले इन निगम कर्मियों का क्रूर चेहरा इस बार एक बेजुबान पर बरसा है। वीडियो देखने के बाद यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि निगम के ये 'असुर' अब सड़कों पर पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं।
शहर में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड-72 स्थित पार्श्वनाथ–अलंकार पैलेस रोड पर नगर निगम के एक वाहन की चपेट में आने से एक बेजुबान श्वान की मौत हो गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि वाहन चालक ने सड़क पर मौजूद श्वान को देखकर भी वाहन नहीं रोका और उसे कुचलते हुए आगे बढ़ गया। घटना के बाद वाहन बिना रुके मौके से निकल गया।
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वायरल वीडियो को लेकर लोगों का कहना है कि यदि चालक थोड़ी भी सावधानी बरतता तो इस बेजुबान की जान बच सकती थी। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि वाहन में बैठे अन्य कर्मचारियों ने भी श्वान को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। घटना के बाद पूरे इलाके में नगर निगम के रवैये को लेकर नाराजगी दिखाई दी। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि नगर निगम का दायित्व केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में मानवीय संवेदनाओं और पशु संरक्षण का भी उतना ही महत्व है। उनका आरोप है कि यदि निगम के वाहन इस तरह लापरवाही से चलेंगे तो सड़क पर चलने वाले आम नागरिकों और बेजुबान पशुओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
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क्रूरता की हदें पार: तमाशबीन बने रहे अधिकारी
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह निगम की गाड़ी एक बेजुबान श्वान (कुत्ते) को बेरहमी से रौंदते हुए निकल जाती है। दिल दहला देने वाली बात यह है कि गाड़ी में बैठे रसूखदार अधिकारियों और कर्मचारियों में से किसी ने भी उस तड़पते हुए जानवर को देखने तक की जहमत नहीं उठाई। गाड़ी का पहिया बेजुबान की हड्डियों को कुचलता रहा और निगम की यह 'टुकड़ी' संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर आगे बढ़ गई।
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जनता में भारी आक्रोश, रडार पर निगम
इस खौफनाक वीडियो के सामने आने के बाद शहर की जनता में भारी उबाल है। नागरिकों का कहना है कि जो निगम कर्मी एक मूक जानवर के प्रति इस कदर हिंसक और संवेदनहीन हो सकते हैं, वे आम जनता के साथ क्या सलूक करते होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सवाल यह उठता है कि आखिर इन 'सरकारी गुंडों' को इतनी बेरहमी की छूट किसने दी? क्या इन पर कभी कोई सख्त कार्रवाई होगी, या हर बार की तरह इस बार भी मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?












