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गुना। शहर में मंगलवार को आई भीषण बाढ़ के बाद गुरुवार को जिले के नागरिकों का सब्र टूट गया। कथित तौर पर गोपालपुरा तालाब की पार (पाल) तोड़ने के कारण आए जलसैलाब और उससे हुए भारी नुकसान के विरोध में आक्रोशित नागरिकों ने एबी रोड स्थित नानाखेड़ी मंडी गेट के पास चक्काजाम कर दिया।
न्यू सिटी, भगत सिंह कॉलोनी, वीआईपी कॉलोनी, पीतांबरा कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और कहा कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासन की घोर लापरवाही और बिना तैयारी के लिए गए फैसलों का नतीजा है।
लोगों ने सवाल उठाया कि अगर तालाब की पाल तोड़नी ही थी, तो क्षेत्रवासियों को पहले से सूचित किया जाना चाहिए था, ताकि वे अपनी जान-माल की सुरक्षा की तैयारी कर पाते। लेकिन न तो कोई चेतावनी दी गई, न ही कोई एहतियाती कदम उठाए गए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्ष 2021 में भी इसी तरह की बाढ़ आई थी, लेकिन प्रशासन ने उससे कोई सीख नहीं ली। बार-बार की तबाही के बावजूद आज तक कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया। इस बार स्थिति और भयावह रही। कॉलोनियों में पानी भर गया, लाखों की संपत्ति नष्ट हो गई, गाड़ियां बह गईं और कई लोगों की जान जोखिम में पड़ गई।
कई पीड़ितों ने बताया कि पानी इतनी तेजी से आया कि किसी को कुछ समेटने तक का समय नहीं मिला। एक युवक गले तक पानी में फंसा हुआ था, जिसे दरवाज़ा तोड़कर निकाला गया। प्रभावित कॉलोनियों में न बिजली है, न पीने का पानी, न खाना, और न ही पहनने के लिए कपड़े। कॉलोनीवासियों ने आरोप लगाया कि तब से लेकर अब तक प्रशासन का कोई प्रतिनिधि हालचाल जानने नहीं आया।
चक्काजाम की सूचना पर मौके पर तहसीलदार, एसडीएम, थाना प्रभारी और नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारियों को संतुष्ट नहीं कर सके। लोगों की मांग थी कि प्रशासन सार्वजनिक रूप से अपनी लापरवाही स्वीकार करें, पीड़ितों को मुआवज़ा दे और भविष्य में बाढ़ से बचाव के लिए ठोस उपाय किए जाएं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह बाढ़ आसमान से नहीं, बल्कि गोपालपुरा तालाब की पाल को जेसीबी से तोड़कर जानबूझकर लाई गई। स्थानीय निवासी अंकित रघुवंशी सहित कई लोगों ने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व चेतावनी के यह कार्रवाई की गई, जिससे हजारों लोग प्रभावित हुए, तीन लोगों की जान चली गई और हर घर की गृहस्थी तबाह हो गई।
लोगों ने मांग की कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पुल-पुलिया और जल निकासी की मजबूत व्यवस्था की जाए। साथ ही बारिश के दौरान जलभराव या बाढ़ की आशंका हो, तो पहले से मुनादी कर लोगों को सतर्क किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि मंगलवार रात से गुरुवार तक किसी भी पीड़ित तक कोई राहत या मदद नहीं पहुंची। उनका आरोप है कि प्रशासन यह देखने तक नहीं आया कि वे जीवित हैं या नहीं।
(रिपोर्ट: राजकुमार रजक, गुना)