बच्चों के मिड-डे मील में ऐसा क्या मिला? 36 छात्र अचानक बीमार, प्रशासन ने लिए खाने के सैंपल

साबरकांठा। गुजरात के साबरकांठा जिले से मिड-डे मील को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इदर तालुका के हसनपुरा प्राइमेरी स्कूल में सोमवार को दोपहर का खाना खाने के बाद 36 स्कूली बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बच्चों ने उल्टी, जी मिचलाने और पेट में जलन जैसी शिकायतें कीं। एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने से स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत भोजन परोसना बंद कर दिया। बीमार बच्चों को इलाज के लिए इदर सिविल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच और उपचार के बाद सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई है। हालांकि, इस घटना के बाद अभिभावकों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका दावा है कि बच्चों को परोसे गए भोजन में तली हुई मरी हुई छिपकली के टुकड़े जैसे अवशेष मिले थे। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और खाने के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
खाना खाने के कुछ देर बाद बिगड़ी बच्चों की तबीयत
बताया गया कि सोमवार को स्कूल में बच्चों को रोज की तरह मिड-डे मील परोसा गया। बच्चों ने भोजन किया और इसके कुछ समय बाद कई बच्चों की तबीयत अचानक खराब होने लगी। बच्चों को उल्टी, जी मिचलाने और पेट में जलन जैसी परेशानियां होने लगीं। जब एक के बाद एक कई बच्चे बीमार पड़ने लगे तो स्कूल प्रबंधन को मामले की गंभीरता का अंदाजा हुआ। इसके बाद स्कूल में भोजन परोसना तुरंत रोक दिया गया। स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों की मदद से बीमार बच्चों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
36 बच्चों को अस्पताल ले जाया गया
एक साथ 36 बच्चों के बीमार पड़ने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें तत्काल इदर सिविल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने बच्चों की जांच शुरू की और जरूरी उपचार दिया। इदर सिविल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय चौहान के अनुसार, बच्चों को समय पर इलाज मिल गया। उपचार के बाद सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई गई और किसी बच्चे की स्थिति खतरे में नहीं थी।
भोजन में छिपकली मिलने का आरोप
घटना के बाद बच्चों के पेरेंट्स ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए। पेरेंट्स का आरोप है कि स्कूल में बच्चों को दिए गए भोजन में मरी हुई छिपकली के टुकड़े जैसा पदार्थ मिला था। इस दावे के सामने आने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी यह पुष्टि नहीं की गई है कि भोजन में वास्तव में छिपकली थी या कोई अन्य पदार्थ। इसी वजह से अधिकारियों ने खाने और खाद्य सामग्री के सैंपल जांच के लिए लिए हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत खराब होने की असली वजह क्या थी।
स्कूल प्रशासन में मची अफरा-तफरी
बच्चों की तबीयत एक साथ बिगड़ने के बाद स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति को देखते हुए तत्काल भोजन वितरण रोक दिया गया। स्कूल प्रबंधन ने मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी। इसके बाद स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हो गया और अधिकारियों की टीम ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू की।
प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही इदर के प्रांत अधिकारी और मामलतदार समेत प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने बीमार बच्चों और उनके परिवारों से जानकारी ली। इसके साथ ही स्कूल में भी मामले की जांच शुरू की गई। अधिकारियों ने भोजन की गुणवत्ता और उसे तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटाई। ताल्लुका प्राथमिक शिक्षा अधिकारी जयेश प्रजापति ने भी घटना की पुष्टि की। उनके अनुसार, मुख्य शिक्षक की ओर से भोजन में छिपकली जैसा अवशेष मिलने की जानकारी दी गई है।
खाने के सैंपल जांच के लिए भेजे गए
मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग्स एंड फूड विभाग की टीम स्कूल पहुंची। टीम ने स्कूल में तैयार और परोसे गए भोजन के साथ-साथ खाद्य सामग्री के सैंपल भी लिए। इन सैंपल की जांच लैब में की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह पता चलेगा कि भोजन दूषित था या बच्चों की तबीयत खराब होने की कोई दूसरी वजह थी। इसलिए फिलहाल भोजन में छिपकली मिलने के दावे को जांच का विषय माना जा रहा है।
फूड पॉइजनिंग की आशंका, रिपोर्ट का इंतजार
36 बच्चों के एक साथ बीमार पड़ने के बाद फूड पॉइजनिंग की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फूड पॉइजनिंग होने की स्थिति में दूषित या खराब भोजन खाने के बाद उल्टी, पेट दर्द, जी मिचलाना और पेट में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों में ऐसे लक्षण सामने आने के बाद डॉक्टरों ने उनका इलाज किया।
बच्चों की हालत खतरे से बाहर
घटना के बाद सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि अस्पताल में भर्ती कराए गए सभी 36 बच्चों की हालत उपचार के बाद स्थिर हो गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बच्चों को समय पर मेडिकल ट्रीटमेंट दिया गया। जरूरी सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। फिलहाल किसी बच्चे के गंभीर स्थिति में होने की जानकारी सामने नहीं आई है।











