पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है। अब तक हवाई हमलों तक सीमित रही यह जंग धीरे-धीरे जमीन पर उतरने की दिशा में बढ़ रही है। इसी बीच अमेरिका और इज़रायल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच हुई एक अहम और गोपनीय बैठक ने पूरे अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य को हिला दिया है। ब्रैड कूपर और एयाल जमीर की इस मुलाकात को आने वाले दिनों की रणनीति तय करने वाला बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में न सिर्फ मौजूदा हालात की समीक्षा की गई, बल्कि ईरान की सैन्य क्षमता को स्थायी रूप से कमजोर करने के विकल्पों पर भी गहन चर्चा हुई। यही वजह है कि अब आशंका जताई जा रही है कि यह संघर्ष केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ही जमीनी कार्रवाई का रूप भी ले सकता है।
इज़रायल में हुई इस हाई-लेवल बैठक में दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व ने मौजूदा जंग की दिशा और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य रूप से दो मुद्दे एजेंडे में शामिल रहे-पहला, पश्चिम एशिया में जारी सैन्य गतिविधियों का आकलन और दूसरा, ईरान के हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने की योजना। अमेरिका और इज़रायल की सबसे बड़ी चिंता यह है कि ईरान भविष्य में फिर से मिसाइल और उन्नत हथियार बनाने की क्षमता हासिल न कर सके। इसी को ध्यान में रखते हुए, संभावित ऑपरेशन के कई विकल्पों पर विचार किया गया, जिसमें लंबी अवधि की सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
अब तक इस संघर्ष में सबसे ज्यादा इस्तेमाल हवाई ताकत का हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में सैकड़ों एयरस्ट्राइक किए जा चुके हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और उच्च पदस्थ अधिकारी निशाना बने हैं। हालांकि केवल हवाई हमलों से रणनीतिक जीत हासिल करना मुश्किल माना जा रहा है। यही वजह है कि अब जमीनी ऑपरेशन की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दुश्मन की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है, तो केवल हवा से हमला काफी नहीं होता- जमीन पर नियंत्रण भी जरूरी होता है।
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पेंटागन ने कथित तौर पर एक लंबे और टिकाऊ ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह ऑपरेशन कई हफ्तों तक चल सकता है और इसके लिए विशेष सैन्य संसाधन तैयार रखे जा रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है। अगर राजनीतिक स्तर पर फैसला लिया जाता है, तो सेना तुरंत जमीन पर उतरने के लिए तैयार होगी।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका डानाल्ड ट्रंप के फैसले की होगी। अभी तक उन्होंने जमीनी हमले को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया है, लेकिन उनके हालिया बयानों से संकेत मिलते हैं कि वे ईरान पर दबाव बढ़ाने के पक्ष में हैं।
अगर ट्रंप जमीनी कार्रवाई को मंजूरी देते हैं, तो यह संघर्ष और ज्यादा व्यापक और खतरनाक हो सकता है। इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
अमेरिका और इज़रायल की रणनीति साफ नजर आती है-ईरान को सैन्य और आर्थिक रूप से इतना कमजोर कर दिया जाए कि वह भविष्य में खतरा न बन सके। इसके लिए लगातार हमले, सप्लाई चेन को तोड़ना और सैन्य ठिकानों को नष्ट करना शामिल है। हालांकि, ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है, जिससे यह संघर्ष और जटिल होता जा रहा है। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य कदम का असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है।
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अगर यह जंग जमीन पर उतरती है, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। जमीनी लड़ाई में सैनिकों की संख्या बढ़ती है, नुकसान ज्यादा होता है और संघर्ष लंबा खिंच सकता है। इसके साथ ही अन्य देशों के भी इसमें शामिल होने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप भी ले सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभावित होंगे।
फिलहाल यह तय नहीं है कि ट्रम्प जमीनी हमले का आदेश देंगे या नहीं। लेकिन इस बैठक और पेंटागन की तैयारियों से यह साफ है कि अमेरिका हर परिस्थिति के लिए खुद को तैयार रख रहा है। दुनियाभर की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह जंग हवा से जमीन पर उतरती है या कोई राजनयिक रास्ता निकलता है।