Government Scheme :गधे पालने पर सरकार देगी 50 लाख रुपए, जानें किसे और कैसे मिलेंगे ये पैसे?

नई दिल्ली। अगर आप पशुपालन के जरिए अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो केंद्र सरकार की एक योजना आपके लिए बड़ा अवसर बन सकती है। सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन सरकार गधा पालन करने वालों को 50 लाख रुपए तक की आर्थिक मदद दे रही है। दरअसल, देश में गधों की संख्या तेजी से कम होती जा रही है। इसी कारण केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission - NLM) के तहत गधे, घोड़े और ऊंट पालन को बढ़ावा देने का फैसला किया है।
सरकार का उद्देश्य केवल पशुपालन बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्वदेशी नस्लों का संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है।
क्यों शुरू की गई यह योजना?
पिछले कुछ सालों में देश में गधों की संख्या तेजी से घट रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2012 से 2019 के बीच गधों की संख्या में लगभग 60 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। 2019 की 20वीं पशुधन जनगणना के अनुसार, भारत में अब केवल करीब 1.23 लाख गधे ही बचे हैं। पहले गधे कई पारंपरिक कामों के लिए उपयोग किए जाते थे, जैसे-
- ईंट और रेत ढोना।
- खेतों में सामान ले जाना।
- ग्रामीण इलाकों में बोझ ढोना।
लेकिन मशीनों और वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण अब इनका उपयोग कम हो गया है। इसी वजह से गधों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
सरकार चाहती है कि इन पशुओं की देशी नस्लें खत्म न हों और लोग इन्हें पालन के जरिए रोजगार का साधन बना सकें।
किन राज्यों में पाए जाते हैं सबसे ज्यादा गधे?
भारत के कई राज्यों में अभी भी गधे पाए जाते हैं, लेकिन उनकी संख्या तेजी से कम हो रही है।
प्रमुख राज्य जहां गधों की संख्या अधिक है-
- राजस्थान
- महाराष्ट्र
- उत्तर प्रदेश
- गुजरात
- बिहार
- जम्मू-कश्मीर
- हिमाचल प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 28 राज्यों में ही गधे पाए जाते हैं, जबकि कुछ राज्यों में इनकी संख्या सिर्फ 2 से 10 तक रह गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि, गधों के संरक्षण की जरूरत कितनी ज्यादा है।
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राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना क्या है?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना की शुरुआत 2014-15 में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पशुपालन को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।
योजना के प्रमुख उद्देश्य
- पशुधन की स्वदेशी नस्लों का संरक्षण
- पशुपालन से रोजगार बढ़ाना
- दूध, मांस, ऊन और चारे का उत्पादन बढ़ाना
- असंगठित पशुपालन क्षेत्र को संगठित करना
- पशुपालकों की आय बढ़ाना
बाद में इस योजना में गधे, घोड़े और ऊंट पालन को भी शामिल किया गया ताकि इनकी घटती संख्या को रोका जा सके।
इस योजना के तहत कितनी मिलेगी सब्सिडी?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अगर कोई व्यक्ति गधा, घोड़ा या ऊंट पालन के लिए प्रोजेक्ट शुरू करता है तो उसे कुल प्रोजेक्ट लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।
सब्सिडी का विवरण
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प्रोजेक्ट लागत |
सरकारी सब्सिडी |
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20 लाख |
10 लाख |
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50 लाख |
25 लाख |
|
1 करोड़ |
50 लाख |
इस योजना के तहत अधिकतम 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिल सकती है।
किन लोगों को मिल सकता है योजना का लाभ?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना का लाभ कई तरह के लोग उठा सकते हैं।
- पात्रता
- व्यक्तिगत किसान
- स्वयं सहायता समूह (SHG)
- किसान उत्पादक संगठन (FPO)
- संयुक्त दायित्व समूह (JLG)
- किसान कंपनियां
- धारा 8 की कंपनियां
इसका मतलब है कि केवल किसान ही नहीं बल्कि उद्यमी भी इस योजना के तहत पशुपालन का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
गधा पालन के लिए क्या हैं नियम?
इस योजना में गधा पालन के लिए कुछ न्यूनतम शर्तें तय की गई हैं।
गधा पालन यूनिट
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पशु |
न्यूनतम संख्या |
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मादा गधे |
50 |
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नर गधे |
5 |
इस यूनिट पर प्रोजेक्ट लागत के अनुसार 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिल सकती है।
घोड़े और ऊंट पालन के नियम
सरकार ने घोड़े और ऊंट पालन के लिए भी अलग यूनिट साइज तय किया है।
घोड़ा पालन
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पशु |
संख्या |
|
मादा घोड़ी |
10 |
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नर घोड़ा |
2 |
ऊंट पालन
ऊंट पालन के लिए यूनिट साइज के अनुसार 3 लाख से 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी दी जाती है।
सब्सिडी कैसे मिलती है?
इस योजना में सब्सिडी एक साथ नहीं मिलती बल्कि दो चरणों में दी जाती है।
भुगतान प्रक्रिया
पहली किस्त - बैंक से लोन मिलने के बाद
दूसरी किस्त - प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद
सरकार यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है।
प्रोजेक्ट में किन चीजों पर खर्च हो सकता है?
इस योजना के तहत मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कई जरूरी कामों में किया जा सकता है।
- खर्च के प्रमुख क्षेत्र
- पशुओं की खरीद
- पशु शेड का निर्माण
- चारा उत्पादन
- पशु बीमा
- प्रजनन प्रबंधन
- चिकित्सा सुविधा
इससे पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जा सकता है।
गधी के दूध को भी बढ़ावा
सरकार केवल पशुओं की संख्या बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दे रही बल्कि गधी के दूध और उससे बनने वाले उत्पादों को भी प्रमोट कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, गधी के दूध में कई पोषक तत्व होते हैं और इसकी मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है।
दिलचस्प तथ्य
- गधी के दूध को फूड कैटेगरी में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।
- कुछ कंपनियां इससे कॉस्मेटिक और हेल्थ प्रोडक्ट भी बना रही हैं।
- योग गुरु बाबा रामदेव ने भी सार्वजनिक रूप से गधी का दूध पीकर इसे स्वादिष्ट बताया था।
- इससे इस क्षेत्र में नए बिजनेस अवसर बनने की संभावना बढ़ गई है।
राज्यों को भी मिल सकती है बड़ी मदद
केवल किसानों को ही नहीं बल्कि राज्य सरकारों को भी इस योजना के तहत मदद मिल सकती है। अगर कोई राज्य गधे, घोड़े और ऊंट की नस्ल संरक्षण के लिए काम करता है तो केंद्र सरकार उसे आर्थिक सहायता देती है।
राज्य सरकारों के लिए मदद
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प्रोजेक्ट |
मदद |
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प्रजनन केंद्र |
सहायता उपलब्ध |
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ब्रीडिंग फार्म |
सहायता उपलब्ध |
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वीर्य स्टेशन |
10 करोड़ तक |
इससे पशुधन संरक्षण को संस्थागत स्तर पर भी बढ़ावा मिलता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर सकती है।
संभावित फायदे
- ग्रामीण रोजगार में वृद्धि
- पशुपालन आधारित उद्योग का विकास
- स्वदेशी नस्लों का संरक्षण
- दूध और अन्य उत्पादों का नया बाजार
आधुनिक मशीनों के कारण पारंपरिक पशु आधारित काम कम हो गए हैं, लेकिन यह योजना पशुपालन को नए बिजनेस मॉडल में बदल सकती है।
NLM योजना के लिए कैसे करें आवेदन?
अगर आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं तो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
आवेदन प्रक्रिया
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- अपनी जानकारी और प्रोजेक्ट डिटेल भरें।
- बैंक से लोन के लिए आवेदन करें।
- प्रोजेक्ट शुरू करें।
- सब्सिडी आपके बैंक खाते में ट्रांसफर होगी।
आधिकारिक वेबसाइट
क्या यह योजना सच में फायदेमंद है?
कृषि और पशुपालन विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाए तो यह कई क्षेत्रों में बदलाव ला सकती है।
संभावित लाभ
- पशुपालन को व्यवसाय के रूप में बढ़ावा
- किसानों की आय में वृद्धि
- दुर्लभ पशु नस्लों का संरक्षण
- ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा
हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि लाभार्थियों को सही जानकारी और प्रशिक्षण भी दिया जाए।











