नई दिल्ली। देश में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने पांच राज्यों से छह उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। पार्टी ने इस सूची में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया है।
राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 10 राज्यों में 16 मार्च को मतदान होगा, जबकि उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती भी की जाएगी।
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राज्य |
उम्मीदवार |
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तेलंगाना |
अभिषेक मनु सिंघवी |
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तेलंगाना |
वेम नरेंद्र रेड्डी |
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छत्तीसगढ़ |
फूलो देवी नेताम |
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हरियाणा |
कर्मवीर सिंह बौद्ध |
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हिमाचल प्रदेश |
अनुराग शर्मा |
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तमिलनाडु |
एम. क्रिस्टोफर तिलक |
इस सूची में कांग्रेस ने क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन किया है।
कांग्रेस ने तेलंगाना की दो सीटों के लिए दो उम्मीदवारों की घोषणा की है।
अभिषेक मनु सिंघवी
अभिषेक मनु सिंघवी देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वे पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और पार्टी के लिए कानूनी और संसदीय मामलों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। उनकी पहचान एक मजबूत संसदीय वक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में है। इसी कारण पार्टी ने उन्हें एक बार फिर राज्यसभा के लिए नामित किया है।
वेम नरेंद्र रेड्डी
दूसरे उम्मीदवार वेम नरेंद्र रेड्डी हैं, जो तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के करीबी सलाहकार माने जाते हैं। राज्य की राजनीति में उनकी अच्छी पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन्हें टिकट दिया है। कांग्रेस को उम्मीद है कि, तेलंगाना विधानसभा में अपनी मजबूत स्थिति के कारण दोनों उम्मीदवार आसानी से जीत दर्ज करेंगे।
छत्तीसगढ़ से कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम को एक बार फिर राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। वे वर्तमान में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष हैं और राज्य की प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिनी जाती हैं।
फूलो देवी नेताम का राजनीतिक अनुभव काफी लंबा रहा है और आदिवासी समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। कांग्रेस ने उन्हें दोबारा टिकट देकर आदिवासी वोट बैंक को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है।
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जानकारी |
विवरण |
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उम्र |
54 वर्ष |
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शिक्षा |
12वीं पास |
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क्षेत्र |
बस्तर |
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पद |
महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष |
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विशेष पहचान |
आदिवासी अधिकारों की मजबूत आवाज |
फूलो देवी नेताम 2013 में हुए झीरम नक्सली हमले के दौरान भी सुरक्षित बच गई थीं। उस हमले में कई कांग्रेस नेताओं की जान चली गई थी।
हरियाणा की राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने कर्मवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। उनके नाम की घोषणा देर रात गहन विचार-विमर्श के बाद की गई। पार्टी में इस सीट के लिए कई नामों की चर्चा चल रही थी। जिनमें उदय भान, जयवीर वाल्मीकि और अशोक तंवर जैसे नेताओं के नाम शामिल थे, लेकिन अंततः कर्मवीर सिंह बौद्ध के नाम पर मुहर लगाई गई। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी उनके नाम का समर्थन किया था।
कर्मवीर सिंह बौद्ध हरियाणा के अंबाला के रहने वाले हैं और प्रशासनिक सेवा में लंबे समय तक कार्य कर चुके हैं।
कर्मवीर सिंह बौद्ध प्रोफाइल
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जानकारी |
विवरण |
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निवास |
अंबाला, हरियाणा |
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पेशा |
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी |
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पद |
एडीओ (सेवानिवृत्त) |
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सामाजिक पहचान |
अनुसूचित जाति समुदाय |
वे हरियाणा सिविल सचिवालय में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं और लगभग चार साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पत्नी भी लेबर डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं।
कर्मवीर बौद्ध को कांग्रेस में गुटबाजी से दूर और सर्वस्वीकार्य नेता माना जाता है। वे “संविधान बचाओ अभियान” सहित कई सामाजिक अभियानों में सक्रिय रहे हैं।
कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश से युवा नेता अनुराग शर्मा को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वे वर्तमान में कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाते हैं।
अनुराग शर्मा प्रोफाइल
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जानकारी |
विवरण |
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शिक्षा |
बीए |
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पेशा |
ट्रांसपोर्ट व्यवसाय |
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पद |
कांगड़ा जिला कांग्रेस अध्यक्ष |
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राजनीतिक शुरुआत |
NSUI से |
अनुराग शर्मा इंटरनेशनल बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन करती है।
कांग्रेस ने तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक को उम्मीदवार बनाया है। राज्य में कांग्रेस DMK गठबंधन के साथ चुनाव लड़ती है और गठबंधन के समर्थन से उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
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राज्यसभा की कुल 37 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं।
चुनाव कार्यक्रम
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तारीख |
प्रक्रिया |
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26 फरवरी |
नोटिफिकेशन जारी |
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5 मार्च |
नामांकन की अंतिम तिथि |
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6 मार्च |
नामांकन पत्रों की जांच |
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9 मार्च |
नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख |
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16 मार्च |
मतदान |
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16 मार्च शाम |
मतगणना |
इन चुनावों के जरिए महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना से चुने गए कुल 37 सांसदों का कार्यकाल समाप्त होगा।
राज्यसभा चुनाव सामान्य चुनावों से अलग होते हैं। इसमें जनता सीधे मतदान नहीं करती, बल्कि राज्य की विधानसभा के विधायक (MLA) सांसदों का चुनाव करते हैं। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए इसे कभी भंग नहीं किया जाता। इसके सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं और हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं।
राज्यसभा की कुल सीटें
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श्रेणी |
सीटें |
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निर्वाचित सदस्य |
233 |
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मनोनीत सदस्य |
12 |
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कुल |
245 |
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक निश्चित संख्या में वोटों की आवश्यकता होती है जिसे कोटा (Quota) कहा जाता है।
इसका फॉर्मूला होता है-
कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1
उदाहरण के तौर पर यदि किसी राज्य में 90 विधायक हैं और 2 सीटों पर चुनाव है, तो:
90 ÷ (2 + 1) = 30
30 + 1 = 31
यानी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 वोट चाहिए होंगे।
हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं।
दलों की ताकत
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पार्टी |
विधायक |
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भाजपा |
48 |
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कांग्रेस |
37 |
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निर्दलीय |
3 |
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इनेलो |
2 |
दो सीटों के चुनाव में जीत के लिए 31 वोट की जरूरत होगी। अगर भाजपा और कांग्रेस एक-एक उम्मीदवार उतारती हैं तो दोनों पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवार को आसानी से जिता सकती हैं। लेकिन अगर भाजपा दूसरी सीट के लिए उम्मीदवार उतारती है तो उसे क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ सकती है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कुल 68 विधायक हैं।
विधानसभा गणित
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पार्टी |
विधायक |
|
कांग्रेस |
40 |
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भाजपा |
28 |
कांग्रेस के पास बहुमत से 5 विधायक ज्यादा हैं, इसलिए अगर भाजपा उम्मीदवार नहीं उतारती तो कांग्रेस के अनुराग शर्मा निर्विरोध चुने जा सकते हैं।
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2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान हिमाचल में बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। उस समय कांग्रेस के पास बहुमत होने के बावजूद उसके कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी थी। इसके कारण भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन चुनाव जीत गए थे। उसके बाद-
हालांकि, बाद में कांग्रेस ने अपनी स्थिति फिर मजबूत कर ली।
कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची को राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी ने अनुभवी नेताओं, सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर टिकट दिया है। विशेष रूप से आदिवासी, अनुसूचित जाति और युवा नेतृत्व को जगह देकर कांग्रेस ने एक व्यापक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।