सीमा पार से घुसपैठ अब नहीं!3D फॉर्मूले के जरिए अवैध घुसपैठियों पर शिकंजा कसने की तैयारी

नई दिल्ली। देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार अब अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर पूरी गंभीरता से काम कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार सीमावर्ती राज्यों का दौरा कर हालात की समीक्षा कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य केवल घुसपैठ रोकना ही नहीं बल्कि देश में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उन्हें वापस भेजना भी है। नक्सलवाद के खिलाफ अपनाए गए मिशन मोड की तरह घुसपैठ के खिलाफ भी समयबद्ध रणनीति बनाई जा सकती है ताकि सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर तेजी से काम कर सकें।
‘डिटेक्ट, डिटेन, डिपोर्ट’ मॉडल पर काम
देश में घुसपैठ और अवैध रूप से रह रहे लोगों का जायजा लेने के लिए हाल ही मे गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात, राजस्थान और त्रिपुरा का दौरा किया था। अमित शाह पश्चिम बंगाल भी जाएंगे और समीक्षा करेंगे, अभी अलग अलग राज्य सरकारों के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल के साथ इस काम को पूरा किया जा रहा है। इसके तहत डिडेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट की तीन चरणों की रणनीति अपनाई गई है, जिसकी लगातार जमीनी मॉनीटिरिंग भी की जा रही है। घुसपैठ खत्म करने के लिए केंद्र सरकार जीरो इनफिल्ट्रेशन की नीति पर काम कर रही है। नक्सलवाद की तर्ज पर घुसपैठ के खात्मे के लिए गृह मंत्री ने सीमा सुरक्षा बल को निर्देश दिया हुआ है।
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घुसपैठ रोकने पर केंद्र का बढ़ा फोकस
नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय तक चले अभियान के बाद अब केंद्र सरकार की प्राथमिकता अवैध घुसपैठ को रोकना बन गई है। गृह मंत्रालय का मानना है कि सीमाओं से होने वाली अवैध आवाजाही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है। इसी वजह से इस दिशा में कार्रवाई तेज कर दी गई है। सरकार चाहती है कि सभी राज्य और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर एक साझा रणनीति के तहत काम करें ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
तीन चरणों की रणनीति पर चल रहा अभियान
घुसपैठ के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पहचान, हिरासत और वापसी की प्रक्रिया को सबसे अहम माना जा रहा है। इसके तहत पहले अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा रही है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें हिरासत में लिया जाता है और फिर संबंधित देश में वापस भेजने की कार्रवाई की जाती है।
सीमावर्ती राज्यों का दौरा कर रहे अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह हाल के महीनों में कई सीमावर्ती राज्यों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के साथ बैठकें कर स्थिति का जायजा लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में अन्य राज्यों में भी समीक्षा बैठकें की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य सीमाओं की निगरानी को और मजबूत बनाना है ताकि घुसपैठ की हर कोशिश को समय रहते रोका जा सके।
तकनीक का बढ़ा इस्तेमाल
सरकार सीमाओं की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। कई संवेदनशील इलाकों में थर्मल कैमरे, सेंसर, ड्रोन और रडार जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन उपकरणों की मदद से रात के समय और कठिन इलाकों में भी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। इसके साथ ही सीमाओं पर फेंसिंग का काम भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
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अवैध निर्माण और जनसंख्या पर नजर
सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाले अवैध निर्माण और अतिक्रमणों की पहचान के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि कई बार ऐसे निर्माण सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा सीमावर्ती इलाकों में जनसंख्या के स्वरूप में हो रहे बदलावों का अध्ययन करने के लिए भी विशेष स्तर पर निगरानी की जा रही है। इस संबंध में विशेषज्ञों की मदद से रिपोर्ट तैयार की जा रही है।











