आग में फंस जाएं तो जान बचा सकता है ये सेफ्टी सिस्टम,लखनऊ-दिल्ली हादसों के बाद बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली। लखनऊ और दिल्ली में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांडों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए हमारे पास पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं। आग लगने के बाद अक्सर कुछ ही मिनटों में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोगों को बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं मिल पाता। कई बार धुआं, बंद दरवाजे और काम न करने वाली लिफ्ट लोगों को मौत के जाल में फंसा देते हैं। लखनऊ के अलीगंज स्थित गेमिंग जोन में हुई आग की घटना और दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में लगी आग ने यह दिखा दिया कि बिल्डिंग्स में सुरक्षित निकासी व्यवस्था कितनी जरूरी है। इन हादसों में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि कई लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों और ऊंची मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए थे।
हादसों ने बढ़ाई सुरक्षा उपकरणों की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि लोगों को तुरंत बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता मिल जाए तो बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए कुछ कंपनियां ऐसे सुरक्षा उपकरण विकसित कर रही हैं, जो आपात स्थिति में लोगों को ऊंची इमारतों से सुरक्षित नीचे उतरने में मदद कर सकें। हाल के दिनों में एक भारतीय स्टार्टअप का ऐसा ही सिस्टम चर्चा में है, जिसे सोशल मीडिया पर भी काफी देखा जा रहा है।
क्या है स्काईड्रॉप का सेफ्टी सिस्टम?
भारतीय स्टार्टअप “स्काईड्रॉप” ने एक ऐसा इमरजेंसी एस्केप सिस्टम तैयार किया है, जिसे घर, फ्लैट, ऑफिस या अन्य बहुमंजिला इमारतों में लगाया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह सिस्टम आग, भूकंप या अन्य आपात स्थितियों में लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का अतिरिक्त विकल्प देता है। इस सिस्टम को आमतौर पर बालकनी या ऐसी जगह लगाया जाता है, जहां से जरूरत पड़ने पर व्यक्ति नीचे उतर सके। इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि कम समय में इसका इस्तेमाल किया जा सके।
कैसे करता है काम?
सिस्टम में मजबूत सेफ्टी केबल, हार्नेस और विशेष मेटल क्लिप दी जाती है। ये सभी उपकरण एक सुरक्षित बॉक्स में लगे होते हैं। आपात स्थिति आने पर व्यक्ति हार्नेस पहनकर केबल से जुड़ता है और नियंत्रित तरीके से नीचे उतर सकता है। कंपनी का कहना है कि इसका उपयोग सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है। इसके साथ प्रशिक्षण और डेमो भी उपलब्ध कराया जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर लोग घबराएं नहीं और सिस्टम का सही उपयोग कर सकें।
जब लिफ्ट और सीढ़ियां जवाब दे दें
आग लगने की स्थिति में सबसे बड़ी समस्या तब पैदा होती है जब सीढ़ियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए या धुएं की वजह से रास्ता बंद हो जाए। कई मामलों में लिफ्ट तुरंत बंद हो जाती है और लोग ऊपरी मंजिलों पर फंस जाते हैं। ऐसे हालात में वैकल्पिक निकासी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। स्काईड्रॉप जैसे सिस्टम इसी उद्देश्य से तैयार किए गए हैं ताकि लोगों के पास अंतिम विकल्प के तौर पर सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता मौजूद रहे।
केवल गैजेट नहीं, जागरूकता भी जरूरी
अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी उपकरण से ज्यादा जरूरी लोगों की तैयारी और जागरूकता है। इमारतों में फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशामक यंत्र और आपात निकासी मार्गों की नियमित जांच होनी चाहिए। साथ ही परिवार के सभी सदस्यों को यह जानकारी भी होनी चाहिए कि आग लगने की स्थिति में क्या करना है और किस रास्ते से बाहर निकलना है। कई बार सही जानकारी और कुछ सेकंड की सतर्कता बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है।
ये भी पढ़ें: कतर के LNG प्लांट में भीषण धमाका : 12 भारतीयों समेत 13 की मौत; 66 लोग घायल, भारतीय दूतावास मदद के लिए आया आगे
बदलती जरूरतों के साथ बदल रही सुरक्षा की सोच
बड़े शहरों में लगातार बढ़ती ऊंची इमारतों और बंद ढांचे वाले व्यावसायिक परिसरों के बीच सुरक्षा को लेकर नई तकनीकों की मांग बढ़ रही है। लखनऊ और दिल्ली जैसे हादसों ने यह साफ कर दिया है कि केवल भवन निर्माण नियम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इमरजेंसी एस्केप सिस्टम और सुरक्षा उपकरणों पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे सिस्टम आम घरों और अपार्टमेंट्स का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि किसी भी सुरक्षा उपकरण को अपनाने से पहले उसकी गुणवत्ता और उपयोग की प्रक्रिया को अच्छी तरह समझना जरूरी है। आग जैसी आपात स्थिति में हर सेकंड कीमती होता है। ऐसे में सही सुरक्षा व्यवस्था और समय पर निकासी का विकल्प कई जिंदगियां बचा सकता है।












