तिरुपति। तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में मिलावट की खबरों के बाद अब भक्तों के लिए एक बड़ा और सुरक्षित कदम उठाया गया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तिरुमला पहाड़ी पर आधुनिक जल और खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यह लैब मंदिर परिसर का हिस्सा है और मंदिर में बनने वाले श्रीवारी प्रसादम् और अन्नप्रसादम् में इस्तेमाल होने वाले घी सहित अन्य कच्चे माल की जांच करेगी। मंदिर में प्रसाद में मिलावट की घटनाओं को रोकने और भक्तों को सुरक्षित प्रसाद सुनिश्चित करने के लिए यह लैब एक स्थायी समाधान के रूप में विकसित की गई है।
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मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने लैब का उद्घाटन करते हुए इसके महत्व पर जोर दिया। उद्घाटन समारोह में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के कार्यकारी निदेशक पांडा और केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के निदेशक गिरिधर भी मौजूद थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को लैब में स्थापित 50 से अधिक आधुनिक उपकरणों के बारे में जानकारी दी और उनकी तकनीकी क्षमताओं को समझाया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह प्रयोगशाला न केवल प्रसाद की शुद्धता सुनिश्चित करेगी बल्कि तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित जल और भोजन की आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी।
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की यह जल और खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला विशेष रूप से कच्चे माल और तैयार उत्पादों की जांच के लिए तैयार की गई है। यहां मुख्य रूप से तीन विभाग हैं:
1. विश्लेषणात्मक (Analytical) – कच्चे माल और तैयार प्रसाद में मिलावट की पहचान
2. आणविक (Molecular) – जैविक और रासायनिक संरचना की जांच
3. सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) – प्रसाद और जल में किसी भी हानिकारक जीवाणु की पहचान
इस लैब में हर महीने 1,000 से 1,500 नमूनों का विश्लेषण किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि तिरुपति मंदिर के प्रसाद और जल की शुद्धता अब नियमित रूप से और वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित की जाएगी।
लैब का निर्माण 12,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में किया गया है और इस पर लगभग 25 करोड़ की लागत आई है। इस आधुनिक सुविधा से मंदिर प्रशासन को न केवल प्रसाद की गुणवत्ता पर नियंत्रण मिलेगा, बल्कि तीर्थयात्रियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित अनुभव भी सुनिश्चित होगा। लैब के निर्माण में आधुनिक उपकरणों और नवीनतम तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे यह पूरे देश में मंदिर प्रसाद और जल जांच की नई मिसाल बन गई है।
तिरुमला की यह प्रयोगशाला मंदिर में प्रसाद तैयार करने से पहले सभी कच्चे माल की गहन जांच करेगी। इसमें घी, आटा, चीनी और अन्य सामग्री शामिल हैं। साथ ही, तैयार प्रसाद और जल के नमूनों का भी नियमित परीक्षण होगा। इस पहल का उद्देश्य भक्तों के लिए सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण प्रसाद सुनिश्चित करना है। अब भक्तों को यह भरोसा होगा कि तिरुपति बालाजी के प्रसाद में कोई मिलावट नहीं होगी और उनका अनुभव पूर्ण रूप से सुरक्षित रहेगा।
तिरुपति बालाजी मंदिर में यह प्रयोगशाला न केवल प्रसाद की शुद्धता सुनिश्चित करेगी बल्कि पूरे देश के धार्मिक स्थलों के लिए सुरक्षा और गुणवत्ता का मानक भी स्थापित करेगी। इसके जरिए भविष्य में किसी भी मिलावट या स्वास्थ्य जोखिम की घटनाओं को रोका जा सकेगा। मुख्यमंत्री नायडू ने भी इसे भक्ति और विज्ञान का संगम बताया, जिससे मंदिर प्रशासन और भक्तों दोनों के लिए विश्वास और सुरक्षा का वातावरण बन सके। इस तरह तिरुपति बालाजी मंदिर नेआधुनिक तकनीक और विज्ञान का उपयोग कर भक्तों के लिए सुरक्षित और शुद्ध प्रसाद सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।