गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले में खाकी को शर्मसार करने वाले हवाला कांड में बड़ी गाज गिरी है। रूठियाई पुलिस चौकी पर एक करोड़ रुपये का संदिग्ध कैश पकड़कर उसे कथित तौर पर सेटलमेंट के बाद छोड़ने के मामले में ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी ने सख्त रुख अपनाते हुए चौकी प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
शनिवार-रविवार की दरम्यानी देर रात धरनावदा थाने और रूठियाई चौकी पहुंचे डीआईजी ने घंटों चली मैराथन पूछताछ के बाद यह माना कि वाहन चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों का आचरण संदिग्ध रहा है और उन्होंने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। देर मामले में एसपी अंकित सोनी ने धरनावदा थाना प्रभारी एसआई प्रभात कटारे समेत चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें एएसआई साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिंह सिकरवार और आरक्षक सुंदर रमन भी शामिल हैं।
पूरे मामले पर ग्वालियर डीआईजी अमित सांघी ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आते ही उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर मामले को समझा डीआईजी के अनुसार, पहली नजर में यह साफ हो रहा है कि 19 मार्च को वाहन चेकिंग के दौरान जो विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए थी, वैसी नहीं की गई। पुलिसकर्मियों का व्यवहार भी अनुचित नहीं पाया गया है, जिसके चलते चौकी प्रभारी और दो अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा रहा है।
हालांकि अभी कोई फरियादी सामने नहीं आया है, लेकिन इस पूरे प्रकरण की विस्तृत और गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान वाहन में सवार लोगों से भी पूछताछ की जाएगी ताकि सच्चाई की तह तक पहुंचा जा सके। निरीक्षण के दौरान मौके पर एसपी अंकित सोनी भी मोजूद रहे।
यह सनसनीखेज घटना गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात की है। नेशनल हाईवे-46 पर रूठियाई पुलिस चौकी के पास चेकिंग के दौरान गुजरात पासिंग स्कॉर्पियो जीजे 05-9351 को रोका गया था। बताया जाता है कि यह गाड़ी एक बड़े जीरा कारोबारी की थी, जिसकी तलाशी लेने पर पुलिस को करीब 1 करोड़ रुपये नकद मिले थे।
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कायदे से इतनी बड़ी राशि मिलने पर आयकर विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करना अनिवार्य था, लेकिन आरोप है कि चौकी स्तर पर ही इस मामले को मैनेज करने की कोशिश की गई। सूत्रों का दावा है कि पुलिस और व्यापारी के बीच 20 लाख रुपये में डील हुई, जिसके बाद 80 लाख रुपये लेकर व्यापारी को छोड़ दिया गया।
इस संदिग्ध लेनदेन में नया मोड़ तब आया जब चर्चाएं शुरू हुईं कि गुजरात के किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद धरनावदा पुलिस ने कथित तौर पर लिए गए 20 लाख रुपये वापस कर दिए। हालांकि, विभाग ने आधिकारिक तौर पर रिफंड की पुष्टि नहीं की है, लेकिन डीआईजी की त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि दाल में कुछ काला जरूर है। मामला तूल पकड़ते ही सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में इसकी तुलना सिवनी के चर्चित हवाला कांड से की जाने लगी, जिससे विभाग की काफी किरकिरी हुई।
डीआईजी अमित सांघी की इस औचक कार्रवाई और निलंबन के बाद पूरे जिले के पुलिस महकमे में हडक़ंप मचा हुआ है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है; विस्तृत जांच के दौरान यदि कोई अन्य पुलिस अधिकारी या कर्मचारी भी दोषी पाया जाता है, तो उस पर भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब उस व्यापारी और वाहन के बारे में अधिक जानकारी जुटा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह पैसा किसका था और उसका उद्देश्य क्या था। फिलहाल, रूठियाई चौकी पर सन्नाटा पसरा है और विभागीय जांच की आंच कई और चेहरों तक पहुंचने की संभावना है।
मामले में DIG ग्वालियर रेंज ने जानकारी दी कि एक वाहन चैकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा संदिगध आचरण हुआ है। मैंनेयहां आकर मामले को समझा है। प्रथम दृष्टया लग रहा है कि 1ृ9 तारीख को वाहन चैकिंग के दौरान विधिसंवत कार्रवाई करनी चाहिए थी वैसे हुई नहीं है।इसमें हम एक डिटेल जांच बिठा रहे हैं। क्योंकि जो भी वाहन है उसका भी फरियादी यहां नही है। लेकिन प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि इसमें एक गहन जांच की आवश्यकता है। मैंने अपनी जांच में पाया है कि प्रथम जो कार्रवाई होनी चाहिए थी वह नहीं हुई है। चौकी प्रभारी सहित तीन अन्य पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा रहा है। आगे जो विस्तृत जांच होगी उसमें पता चलेगा कि यह पूरा मामला क्या है। जो वाहन में बैठे थे उनसे भी पूछताछ की जाएगी।- अमित सांघी,