मोटापा बनेगा नौकरी जाने की वजह!नए नियम ने बढ़ाई टेंशन, जानिए कैसे?

Air India की नई हेल्थ और फिटनेस पॉलिसी के तहत अब केबिन क्रू का मूल्यांकन उनके बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और फंक्शनल फिटनेस टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। 18 से 24.9 BMI को सामान्य और उपयुक्त माना जाएगा, जबकि 18 से कम और 25 से 29.9 BMI वाले कर्मचारियों को मेडिकल जांच और फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा।
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नए नियम ने बढ़ाई टेंशन, जानिए कैसे?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नौकरी अब सिर्फ काम करने की काबिलियत से नहीं, बल्कि शरीर के वजन और फिटनेस के पैमाने से तय होती नजर आ रही है। अब एअर इंडिया ने अपने केबिन क्रू के लिए एक नई और सख्त नीति लागू करने की तैयारी कर ली है। इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों को फिट और प्रोफेशनल मानकों के अनुरूप बनाए रखना बताया जा रहा है, लेकिन इसके असर सीधे उनकी ड्यूटी और सैलरी पर पड़ सकते हैं।

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    BMI के आधार पर होगा मूल्यांकन

    नई नीति में कर्मचारियों का आकलन उनके बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के आधार पर किया जाएगा। एयरलाइन ने BMI को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा है-

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    • 18 से 24.9 BMI: सामान्य और उपयुक्त
    • 18 से कम BMI: कम वजन
    • 25 से 29.9 BMI: ज्यादा वजन
    • 30 या उससे अधिक BMI: मोटापा 

    इस सिस्टम के जरिए एयरलाइन यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी केबिन क्रू एक तय फिटनेस स्तर बनाए रखें।

    कम और ज्यादा वजन पर क्या होगा असर?

    यदि किसी केबिन क्रू का BMI तय सीमा से बाहर पाया जाता है, तो उसे तुरंत ड्यूटी रोस्टर से हटाया जा सकता है। ऐसे कर्मचारियों को एक फंक्शनल फिटनेस टेस्ट देना होगा। अगर टेस्ट पास कर लिया, तो वापसी संभव है। अगर टेस्ट में फेल हुए, तो तब तक बिना वेतन रखा जा सकता है जब तक वे मानकों को पूरा न करें। इस प्रक्रिया को एयरलाइन एक सुधारात्मक कदम के रूप में देख रही है, न कि केवल दंडात्मक कार्रवाई के रूप में।

    मोटापे की श्रेणी में आने पर सख्ती

    जिन कर्मचारियों का BMI 30 या उससे अधिक होगा, उन्हें सीधे ‘मोटापा’ श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों में-

    • तुरंत ड्यूटी से हटाया जाएगा
    • वेतन रोका जा सकता है
    • तय समय सीमा के भीतर BMI सुधारना अनिवार्य होगा।

    यह कदम एयरलाइन की ओर से सबसे सख्त माना जा रहा है, जो साफ संकेत देता है कि फिटनेस को अब प्रोफेशनल जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाएगा।

    मेडिकल जांच और फिटनेस टेस्ट की भूमिका

    कम वजन या ज्यादा वजन वाले कर्मचारियों के लिए मेडिकल जांच और फंक्शनल फिटनेस टेस्ट जरूरी होगा। अगर वे इन दोनों चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लेते हैं, तो उन्हें ड्यूटी पर बनाए रखा जा सकता है।
    इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल वजन नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यक्षमता और शारीरिक क्षमता को परखना है, ताकि उड़ान संचालन सुरक्षित और प्रभावी बना रहे।

    कब से लागू होगी यह नीति?

    रिपोर्ट्स के अनुसार यह नई नीति 1 मई से लागू होने की संभावना है। यह नियम न केवल वर्तमान में कार्यरत केबिन क्रू पर लागू होंगे, बल्कि ट्रेनिंग ले रहे कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू किए जाएंगे।

    कंपनी का आधिकारिक संदेश

    एयरलाइन ने अपने स्टाफ को संदेश भेजकर बताया कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों में स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इसे एक शुरुआती कदम बताया गया है, जो भविष्य में और सख्त फिटनेस मानकों की नींव रखेगा।
    संदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह पॉलिसी कर्मचारियों को सही वजन बनाए रखने की प्रक्रिया से परिचित कराने और उन्हें एक बेहतर फिटनेस स्तर तक पहुंचाने के लिए तैयार की गई है।

    टाटा के बाद बदलाव की रफ्तार

    जब से Tata Group ने जनवरी 2022 में एयर इंडिया का अधिग्रहण किया है, तब से एयरलाइन में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पुराने ढांचे को धीरे-धीरे बदला जा रहा है और नई नीतियों के जरिए ऑपरेशनल और प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स को ऊंचा किया जा रहा है।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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