तुरंत बंद करो हमले...होर्मुज संकट पर 22 देशों ने ईरान को दी सख्त चेतावनी, समुद्र में माइंस बिछाने पर भी जताई चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की गतिविधियों को लेकर 22 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर गंभीर चिंता जताई है। इन देशों ने कमर्शियल जहाजों पर हमले रोकने और समुद्री मार्ग खोलने की मांग की है। तेल आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ईरान से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने को कहा है।
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होर्मुज संकट पर 22 देशों ने ईरान को दी सख्त चेतावनी, समुद्र में माइंस बिछाने पर भी जताई चिंता
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    Middle East Crisis। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक स्तर पर बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और जहाजों पर हमलों के बाद दुनिया के कई बड़े देशों ने ईरान के खिलाफ कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है।

    संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत 22 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान से तुरंत हमले रोकने और होर्मुज मार्ग को सुरक्षित करने की मांग की है। इन देशों ने कहा कि, कमर्शियल जहाजों पर हमले और समुद्री मार्ग को बाधित करना अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।

    22 देशों ने जारी किया संयुक्त बयान

    संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में दुनिया के कई प्रमुख देशों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त बयान जारी करने वाले देशों में शामिल हैं-

    1. संयुक्त अरब अमीरात
    2. यूनाइटेड किंगडम
    3. फ्रांस
    4. जर्मनी
    5. इटली
    6. नीदरलैंड
    7. जापान
    8. कनाडा
    9. दक्षिण कोरिया
    10. न्यूजीलैंड
    11. डेनमार्क
    12. लातविया
    13. स्लोवेनिया
    14. एस्टोनिया
    15. नॉर्वे
    16. स्वीडन
    17. फिनलैंड
    18. चेकिया
    19. रोमानिया
    20. बहरीन
    21. लिथुआनिया
    22. ऑस्ट्रेलिया

    इन देशों ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

    ईरान के हमलों की कड़ी निंदा

    संयुक्त बयान में ईरान पर आरोप लगाया गया है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में निहत्थे कमर्शियल जहाजों और तेल-गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। बयान में कहा गया कि, हम खाड़ी में कमर्शियल जहाजों पर हाल के हमलों, नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की कोशिशों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।

    इन देशों ने ईरान से तुरंत ड्रोन हमले रोकने, मिसाइल हमले बंद करने, समुद्र में माइंस बिछाना बंद करने और कमर्शियल शिपिंग में बाधा डालना रोकने की मांग की है।

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    अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया

    संयुक्त बयान में कहा गया कि होर्मुज में ईरान की गतिविधियां संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत नेविगेशन की स्वतंत्रता के सिद्धांत का उल्लंघन हैं। इसके अलावा देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का भी हवाला दिया और ईरान से इसका पालन करने की मांग की।

    देशों का कहना है कि, समुद्री मार्गों पर हमला करना केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला कदम है।

    दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल यहां से वैश्विक बाजारों में भेजा जाता है। लेकिन हाल के तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई जगह शिपिंग ट्रैफिक में लगभग 97 प्रतिशत तक कमी देखी गई है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा हो गई है और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

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    वैश्विक ऊर्जा बाजार में संकट

    तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से दुनिया के कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर, गैस आपूर्ति पर, अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर पड़ेगा। इस संकट का सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ सकता है, क्योंकि वे ऊर्जा आयात पर ज्यादा निर्भर होते हैं।

    IEA ने उठाया बड़ा कदम

    स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी बड़ा फैसला लिया है। IEA ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) से तेल बाजार में छोड़ने का निर्णय लिया है ताकि तेल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखी जा सके। 22 देशों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में मदद करेगा।

    यह भी पढ़ें: 48 घंटे में होर्मुज खोलो वरना... ट्रंप का ईरान को आखिरी अल्टीमेटम, ईरान का जवाब- ‘जैसे को तैसा’ कार्रवाई करेंगे

    तेल उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

    संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि ऊर्जा संकट को कम करने के लिए कई देश तेल उत्पादन बढ़ाने पर भी विचार कर रहे हैं। इसके लिए प्रमुख तेल उत्पादक देशों से बातचीत, ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने की रणनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने की कोशिश जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

    सबसे कमजोर देशों को दी जाएगी मदद

    संकट का असर कई गरीब और विकासशील देशों पर ज्यादा पड़ सकता है। इसलिए बयान में कहा गया कि, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान (IFIs) और संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर उन देशों की मदद की जाएगी जो इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यह मदद आर्थिक सहायता, ऊर्जा आपूर्ति और आपातकालीन राहत के रूप में दी जा सकती है।

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    समुद्री सुरक्षा के लिए नई योजना

    होर्मुज संकट के बाद कई देशों ने समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इन देशों का कहना है कि वे मिलकर एक ऐसी रणनीति तैयार करेंगे जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सुरक्षित रहे, समुद्री मार्ग खुला रहे, तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो। इस योजना में अन्य देशों को भी शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है।

    क्यों इतना अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और कई बड़े तेल उत्पादक देशों का निर्यात इसी रास्ते से होता है। अगर यह मार्ग बंद हो जाता है तो-

    • वैश्विक तेल सप्लाई पर भारी असर पड़ सकता है
    • अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधित हो सकता है
    • कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो सकता है

    यही वजह है कि दुनिया के कई देश इस क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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