मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य करने के फैसले पर अब बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के सरकारी शिक्षक संगठन ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। संगठन 23 मार्च 2026 को याचिका दायर करेगा जिसमें खास तौर पर 2013 से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत देने की मांग की गई है।
शिक्षक संगठन का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति साल 2013 से पहले हुई थी, उन्हें TET की अनिवार्यता से बाहर रखा जाना चाहिए। याचिका में मांग की गई है कि शिक्षाकर्मी, संविदा शिक्षक और गुरुजी, जो लंबे समय से सेवा दे रहे हैं उन्हें अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर इस परीक्षा से छूट दी जाए।
संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल के अनुसार, एक विशेष टीम दिल्ली में मौजूद है, जो याचिका को अंतिम रूप दे रही है। इस प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसके गांगेले से कानूनी सलाह ली गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल ही में आदेश जारी कर TET को अनिवार्य कर दिया है। आदेश के अनुसार:
विभाग ने अपने आदेश में कुछ राहत भी दी है जिनमें
शिक्षकों को TET पास करने के लिए 2 साल का समय दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के भीतर परीक्षा पास करना जरूरी होगा।
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अब पूरे प्रदेश की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। अगर कोर्ट इस याचिका को स्वीकार कर अंतरिम रोक (स्टे) देता है तो TET से जुड़ी मौजूदा प्रक्रिया पर तत्काल असर पड़ सकता है। इससे लाखों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।