दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देश के अलग अलग राज्यों से चार संदिग्ध युवाओं को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार ये सभी युवक ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे और सोशल मीडिया के एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स के जरिए दूसरे युवाओं को भी अपने नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस का दावा है कि यह मॉड्यूल संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाने की तैयारी में था। इस पूरे मामले ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी सोशल मीडिया और निजी चैट ग्रुप्स के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश करने की कोशिश कर रहे थे। इन प्लेटफॉर्म्स पर कथित तौर पर उग्र और देशविरोधी सामग्री साझा की जा रही थी। पुलिस को ऐसे डिजिटल चैट रिकॉर्ड मिले हैं जिनमें संदिग्ध गतिविधियों और संवेदनशील स्थानों को लेकर बातचीत के संकेत मिले हैं। स्पेशल सेल का मानना है कि आरोपी केवल ऑनलाइन प्रचार तक सीमित नहीं थे बल्कि युवाओं को अपने नेटवर्क से जोड़ने और उन्हें कट्टर सोच की ओर धकेलने का प्रयास भी कर रहे थे। यही वजह है कि इस पूरे नेटवर्क को एक डिजिटल स्लीपर सेल की तरह देखा जा रहा है।
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि एक आरोपी के पास से इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस यानी IED से जुड़ी सामग्री मिलने की बात सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार कुछ संदिग्ध स्थानीय बाजार से मिलने वाले सामान का इस्तेमाल कर रिमोट कंट्रोल डिवाइस तैयार करने की कोशिश कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि खिलौना कार, रिमोट, बॉल बेयरिंग और कीलों जैसी चीजों का इस्तेमाल कर विस्फोटक डिवाइस बनाने की चर्चा डिजिटल चैट्स में की गई थी। फिलहाल पुलिस बरामद सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज चुकी है।
पुलिस जांच में यह भी दावा किया गया है कि आरोपी कुछ बेहद संवेदनशील स्थानों की रेकी कर रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार जिन स्थानों का नाम सामने आया है उनमें राम मंदिर, संसद भवन और कुछ सैन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक एक आरोपी ने सोशल मीडिया पर एक एडिट की हुई तस्वीर भी साझा की थी जिसमें लाल किले पर काला झंडा दिखाया गया था। इसे पुलिस कट्टरपंथी मानसिकता और प्रतीकात्मक प्रचार का हिस्सा मान रही है। यही वजह है कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
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पुलिस की जांच अब फंडिंग नेटवर्क पर भी केंद्रित है। शुरुआती जानकारी के अनुसार एक आरोपी ने कथित तौर पर ऑनलाइन भुगतान माध्यमों और क्यूआर कोड के जरिए पैसे जुटाने की कोशिश की। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह पैसा कहां से आ रहा था और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था। जांच एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क के पीछे एक बड़ा फंडिंग चैनल भी सक्रिय हो सकता है। इसी वजह से बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन लेनदेन का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
स्पेशल सेल ने इस कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया। दिल्ली से मिले इनपुट्स के बाद महाराष्ट्र, ओडिशा और बिहार में स्थानीय पुलिस की मदद से छापेमारी की गई। अलग-अलग जगहों से संदिग्धों को हिरासत में लेकर दिल्ली लाया गया, जहां उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई कई दिनों की डिजिटल निगरानी और तकनीकी सर्विलांस के बाद की गई। सोशल मीडिया गतिविधियों और एन्क्रिप्टेड चैट्स के आधार पर संदिग्धों तक पहुंच बनाई गई।
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले को केवल चार गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं मान रही हैं। जांच का फोकस अब इस बात पर है कि क्या यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा था और इसके तार देश के अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जुड़े हैं। डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा के आधार पर कई और लोगों से पूछताछ की संभावना है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित करने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क्स पर विशेष नजर रख रही हैं। फिलहाल चारों आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और उनके अन्य साथियों की तलाश जारी है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि देश की संवेदनशील जगहों की सुरक्षा को देखते हुए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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