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3 दिन बाद ही DK शिवकुमार सरकार में दरार!मनचाहा विभाग नहीं मिला तो मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा, वादाखिलाफी का लगाया आरोप

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की नई सरकार को बड़ा झटका लगा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने विभागों के बंटवारे से नाराज होकर मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। रेड्डी बेंगलुरु विकास विभाग चाहते थे, लेकिन उन्हें जल संसाधन विभाग दिया गया। इस घटनाक्रम ने नई सरकार के भीतर असंतोष की चर्चा तेज कर दी है।
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मनचाहा विभाग नहीं मिला तो मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा, वादाखिलाफी का लगाया आरोप

बेंगलुरु। कर्नाटक में नई सरकार के गठन के महज कुछ दिन बाद ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार को पहला बड़ा झटका तब लगा, जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। विभागों के बंटवारे से नाराज रेड्डी का कहना है कि, उन्हें पहले बेंगलुरु विकास विभाग देने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन बाद में जल संसाधन विभाग सौंप दिया गया। इस फैसले के विरोध में उन्होंने मंत्री पद छोड़ने का फैसला किया।

विभागों के बंटवारे के बाद सामने आया असंतोष

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार रात अपने मंत्रिमंडल के 13 सदस्यों के बीच विभागों का बंटवारा किया। इस दौरान रामलिंगा रेड्डी को जल संसाधन (प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई) विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि रेड्डी इस फैसले से संतुष्ट नहीं थे। उनका कहना है कि, उन्हें लंबे समय से बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने का आश्वासन मिलता रहा था। जब विभागों की अंतिम सूची सामने आई और यह विभाग कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंप दिया गया, तो उन्होंने नाराजगी जताई और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

इस्तीफे के बाद क्या बोले रामलिंगा रेड्डी?

मीडिया से बातचीत में रामलिंगा रेड्डी ने साफ कहा कि उनका विरोध कांग्रेस पार्टी से नहीं है। उन्होंने कहा, मैं अभी भी कांग्रेस पार्टी में हूं। मैंने पार्टी नहीं छोड़ी है। पिछले 53 सालों से कांग्रेस से जुड़ा हूं। मैंने पार्टी में कई जिम्मेदारियां निभाई हैं और कई मुख्यमंत्रियों के साथ मंत्री के रूप में काम किया है। मैंने कभी किसी से मंत्री पद नहीं मांगा। रेड्डी ने कहा कि, वे विधायक बने रहेंगे और जनता की सेवा जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी किसी व्यक्ति विशेष से नहीं है, बल्कि विभागों के आवंटन को लेकर है।

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वादा किया था, लेकिन निभाया नहीं गया

रामलिंगा रेड्डी ने दावा किया कि डीके शिवकुमार ने उन्हें कई बार भरोसा दिलाया था कि, मुख्यमंत्री बनने के बाद वे बेंगलुरु विकास विभाग छोड़ देंगे और यह जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जाएगी। रेड्डी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उनके घर जाकर भी इस संबंध में आश्वासन दिया था। यहां तक कि शपथ ग्रहण से एक दिन पहले भी उन्हें यही भरोसा दिया गया था कि बेंगलुरु विकास विभाग उनके पास आएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी खुद इस विभाग की मांग नहीं की, लेकिन जब बार-बार आश्वासन दिया गया और बाद में फैसला बदल गया, तो उन्हें गहरा धक्का लगा।

कैबिनेट बैठक से बीच में ही निकल गए थे रेड्डी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विभागों के बंटवारे को लेकर हुई पहली कैबिनेट बैठक के दौरान ही रामलिंगा रेड्डी ने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी थी। बताया जा रहा है कि, बैठक में उन्होंने मुख्यमंत्री को 2023 में किए गए उस वादे की याद दिलाई, जिसमें भविष्य में बेंगलुरु विकास विभाग देने की बात कही गई थी। चर्चा के दौरान असहमति बढ़ी और वे बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए। यहीं से यह संकेत मिलने लगे थे कि सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

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मंत्री पद छोड़ा, कांग्रेस नहीं

इस्तीफा देते समय रेड्डी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने केवल मंत्री पद छोड़ा है, कांग्रेस पार्टी नहीं। उन्होंने कहा कि वे न तो मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से नाराज हैं और न ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से। उनका फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत और सिद्धांत आधारित है। रेड्डी ने यह भी बताया कि, वे अपना इस्तीफा व्यक्तिगत रूप से नहीं सौंपेंगे, बल्कि एक समर्थक के माध्यम से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भेजेंगे।

कौन हैं रामलिंगा रेड्डी?

72 वर्षीय रामलिंगा रेड्डी कर्नाटक की राजनीति का बड़ा नाम माने जाते हैं। वे बेंगलुरु के बीटीएम लेआउट विधानसभा क्षेत्र से आठ बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनके पास प्रशासनिक अनुभव की लंबी पारी है। वे पहले गृह मंत्री, परिवहन मंत्री और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार के.आर. श्रीधरा को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी थी।

डीके कैबिनेट में परिवारवाद पर भी चर्चा

नई कैबिनेट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियंक खड़गे और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। प्रियंक खड़गे को गृह विभाग (इंटेलिजेंस छोड़कर), आईटी-बीटी और ई-गवर्नेंस विभाग सौंपा गया है। वहीं यतींद्र सिद्धारमैया को शहरी विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसी वजह से विभागों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

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किसे मिला कौन सा विभाग?

नई कैबिनेट में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वित्त, कैबिनेट मामले, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार, खुफिया विभाग और अन्य अविभाजित विभाग अपने पास रखे हैं।

  • जी परमेश्वर - राजस्व और खेल विभाग
  • प्रियंक खड़गे - गृह, आईटी-बीटी और ई-गवर्नेंस
  • सतीश जारकीहोली - लोक निर्माण विभाग
  • केएच मुनियप्पा - खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति
  • एमबी पाटिल - उद्योग एवं आधारभूत संरचना
  • केजे जॉर्ज - ऊर्जा और पर्यटन
  • कृष्णा बायरे गौड़ा - ग्रेटर बेंगलुरु विकास विभाग
  • यूटी खादर - स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
  • ईश्वर खंड्रे - ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज
  • यतींद्र सिद्धारमैया - शहरी विकास
  • बैराठी सुरेश - परिवहन
  • शरण प्रकाश पाटिल - चिकित्सा शिक्षा एवं कौशल विकास
  • रामलिंगा रेड्डी - जल संसाधन विभाग (जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया)

सरकार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?

डीके शिवकुमार ने हाल ही में कर्नाटक के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों के अंदर एक वरिष्ठ मंत्री का इस्तीफा सामने आना राजनीतिक रूप से बड़ा संकेत माना जा रहा है। 

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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