प्रवीण श्रीवास्तव। भोपाल में कमर्शियल गैस की कमी ने शहर की हवा की गुणवत्ता पर असर डालना शुरू कर दिया है। होटल-ढाबों में बढ़ते कोयला-लकड़ी के उपयोग से AQI में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
शहर के कई छोटे होटल, ढाबे और फूड स्टॉल संचालकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने से उन्हें मजबूरी में पुराने तरीकों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में कोयले और लकड़ी के चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ गया है। आंकड़ों के अनुसार 8 मार्च को कलेक्टोरेट क्षेत्र में AQI करीब 95 था, जो 16 मार्च तक बढ़कर 142 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो शहर की हवा की गुणवत्ता और बिगड़ सकती है।
गैस की कमी के चलते ईंधन के दूसरे विकल्पों की मांग बढ़ गई है। स्थानीय कारोबारियों के मुताबिक कोयले और लकड़ी की कीमतों में भी लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करीब दो सप्ताह पहले जो पत्थर का कोयला 18 से 22 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, वह अब 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
वहीं लकड़ी के कोयले की कीमत भी 55 रुपये से बढ़कर लगभग 65 रुपये प्रति किलो हो गई है। छोटे ढाबों में जहां लकड़ी और कोयले की भट्टियां जल रही हैं, वहीं शहर के बड़े होटलों में डीजल भट्टियों का उपयोग बढ़ने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लकड़ी और कोयले के धुएं से हवा में हानिकारक कणों की मात्रा तेजी से बढ़ती है। श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शर्मा का कहना है कि इस तरह के धुएं से अस्थमा, एलर्जी और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को अधिक परेशानी हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि लगातार प्रदूषित हवा में रहने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।