Bhopal AQI :गैस किल्लत से होटल-ढाबों में जलीं कोयला-लकड़ी भट्टियां, AQI सात दिन में 45 अंक बढ़ा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ ग्लोबल मार्केट या ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर अब लोकल स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कमर्शियल एलपीजी की किल्लत के चलते होटल-ढाबों और फूड स्टॉल संचालकों ने लकड़ी और कोयले की भट्टियों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर शहर की हवा की गुणवत्ता पर पड़ा है।
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गैस किल्लत से होटल-ढाबों में जलीं कोयला-लकड़ी भट्टियां, AQI सात दिन में 45 अंक बढ़ा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रवीण श्रीवास्तव। भोपाल में कमर्शियल गैस की कमी ने शहर की हवा की गुणवत्ता पर असर डालना शुरू कर दिया है। होटल-ढाबों में बढ़ते कोयला-लकड़ी के उपयोग से AQI में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

    पिछले सात दिनों में AQI 45 अंक तक बढ़ा 

    शहर के कई छोटे होटल, ढाबे और फूड स्टॉल संचालकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने से उन्हें मजबूरी में पुराने तरीकों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे में कोयले और लकड़ी के चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ गया है। आंकड़ों के अनुसार 8 मार्च को कलेक्टोरेट क्षेत्र में AQI करीब 95 था, जो 16 मार्च तक बढ़कर 142 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो शहर की हवा की गुणवत्ता और बिगड़ सकती है।

    कोयले और लकड़ी के दामों में भी तेज बढ़ोतरी

    गैस की कमी के चलते ईंधन के दूसरे विकल्पों की मांग बढ़ गई है। स्थानीय कारोबारियों के मुताबिक कोयले और लकड़ी की कीमतों में भी लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करीब दो सप्ताह पहले जो पत्थर का कोयला 18 से 22 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, वह अब 25 से 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

    वहीं लकड़ी के कोयले की कीमत भी 55 रुपये से बढ़कर लगभग 65 रुपये प्रति किलो हो गई है। छोटे ढाबों में जहां लकड़ी और कोयले की भट्टियां जल रही हैं, वहीं शहर के बड़े होटलों में डीजल भट्टियों का उपयोग बढ़ने लगा है।

    प्रदूषण बढ़ने से स्वास्थ्य पर खतरा

    विशेषज्ञों का मानना है कि लकड़ी और कोयले के धुएं से हवा में हानिकारक कणों की मात्रा तेजी से बढ़ती है। श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शर्मा का कहना है कि इस तरह के धुएं से अस्थमा, एलर्जी और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को अधिक परेशानी हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि लगातार प्रदूषित हवा में रहने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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