Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अनुमान जताया है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की अर्थव्यवस्था 7.3 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ सकती है। मूडीज के मुताबिक, यह तेज आर्थिक वृद्धि न केवल औसत घरेलू आय को सहारा देगी, बल्कि बीमा उत्पादों की मांग को भी बढ़ावा देगी। एजेंसी का मानना है कि बढ़ती आय, बेहतर जागरूकता और डिजिटलीकरण के कारण आने वाले समय में भारत का बीमा क्षेत्र लगातार मजबूत होता जाएगा। मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रही थी, जबकि FY26 में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है। आर्थिक विस्तार का सीधा फायदा आम लोगों की आय पर पड़ेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि FY25 में प्रति व्यक्ति जीडीपी सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 11,176 डॉलर तक पहुंच गई।
जब लोगों की आय बढ़ती है, तो वे अपने स्वास्थ्य, जीवन और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सजग होते हैं, जिससे बीमा लेने की प्रवृत्ति मजबूत होती है। इसका असर बीमा प्रीमियम के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है। मूडीज के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच कुल बीमा प्रीमियम आय में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 10.9 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इस दौरान हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में करीब 14 प्रतिशत और लाइफ इंश्योरेंस के नए कारोबार में लगभग 20 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। यह वृद्धि पिछले साल की तुलना में कहीं ज्यादा है, क्योंकि 2024-25 में कुल प्रीमियम में केवल 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीमा क्षेत्र की यह मजबूती केवल आर्थिक वृद्धि का नतीजा नहीं है। इसके पीछे उपभोक्ताओं में बढ़ती जागरूकता और बढ़ता डिजिटलीकरण भी अहम भूमिका निभा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बीमा उत्पादों की पहुंच आसान हो गई है, जिससे ज्यादा लोग बीमा कवर लेने लगे हैं। यह रुझान बीमा नियामक के 2047 तक सभी के लिए बीमा के लक्ष्य के अनुरूप है। मूडीज ने यह भी बताया कि सरकार राज्य-स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों की लाभप्रदता सुधारने पर जोर दे रही है। इसके लिए एलआईसी में आंशिक हिस्सेदारी बेचने, कुछ कंपनियों के पुनर्पूंजीकरण और कमजोर प्रदर्शन करने वाली इकाइयों के विलय या निजीकरण जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है। इन सुधारों से न केवल सरकारी बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिति बेहतर हो सकती है, बल्कि पूरे बीमा सेक्टर की सेहत में भी सुधार आने की संभावना है। कुल मिलाकर, मजबूत आर्थिक वृद्धि भारत के बीमा उद्योग के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार कर रही है।